लधु उद्योगों ने दिलाया कानपुर को मैनचेस्टरका दर्जा आॅफ इंडिया

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Wednesday 2nd of September 2015 05:29:51 PM


अपनी माँ और बाबूजी के आदर्शों पर चलकर और अपने कठिन परिश्रम, ईमानदारी व लगन के चलते कानपुर के उद्योग को शिखर पर पहुँचा कर शहर का नाम रोशन करने वाले गत 16 वर्षों से कानपुर इंडस्ट्रियल एरिया के चेयरमैन मलिक विजय कपूर आज किसी परिचय को मोहताज नहीं। उद्योग जगत की बैक-बोन होने के साथ-साथ श्री कपूर देना बैंक के डायरेक्टर भी हैं और इन्होने एक सफल समाज सेवी के रूप में भी शहर को बहुत कुछ दिया। आज इनके स्कूल में प्रतिवर्ष करीब 800 निर्धन बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। प्रस्तुत है हमारे मैनेजिंग एडिटर अनुज निगम ‘मोहित’ कीे मलिक विजय कपूर से हुई एक खास मुलाकात के कुछ प्रमुख अंश:-
विजय जी, आप शहर के एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते है, जहाँ आपके परिवार की एक शख्सियत ने राजनीति में, दूसरे ने शिक्षा के क्षेत्र में और आपने औद्योगिक क्षेत्र एवं समाज सेवा में अपना योगदान कर पूरे देश में कानपुर का नाम रोशन किया। आज इस मुकाम पर पहुंच कर आप कैसा महसूस करते है और किसको इसका श्रेय देते हैं ?

ईश्वर की कृपा से आज हम तीनों भाई जिस मुकाम पर पहुँचे हैं उसमें सबसे बड़ा योगदान हमारे पिता जी का हैं हम तीनों भाईयों में बहुत प्रेम है, बहुत एकता है, इस सब के पीछे हमारे दादा-दादी, माँ और पिता जी का आर्शिवाद है। बड़ों का आर्शिवाद, हम तीनों भाइयों की एकजुटता, लगन और कड़ी मेहनत का नतीजा है जो हम इस मुकाम पर हैं।
 
कानपुर इंडस्ट्रियल स्टेट के चेयरपर्सन के  साथ ही आप देना बैंक के डायरेक्टर भी है। कैसे सामंजस्य बिठाते है दोनों कार्यक्षेत्र में और इतने जिम्मेदार पद पर होते हुए परिवार के लिए कैसे वक्त निकालते हैं?

हर चीज का एक समय होता है, अगर आदमी जिन्दगी में कुछ करना चाहता है तो उसमें दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए। आदमी में अगर इच्छाशक्ति है तो उसके लिए कोई भी कार्य असम्भव नहीं है। आज लोगांे में इसका काफी आभाव है। अपने दैनिक जीवन में मैं 8 से 10 घंटे अपनी फैक्ट्री में देता हूँ, इंडस्ट्रियल स्टेट के चेयरमैन होने के नाते रोज शाम को 2 घंटे अपने इंडस्ट्रियलिस्ट भाइयों के साथ बैठता हँू। और बात रही देना बैंक के डायरेक्टर पद की तो महीने में 3-4 मीटिंग्स होती है, जिसके लिए बाहर जाना पड़ता है। इन सब के साथ मैं गैंजस क्लब तथा कई अन्य संस्थाओं का भी चेयरमैन हैँू। इन सभी कार्यों के पीछे मेरे प्रेरणास्त्रोत मेरे माताजी-पिताजी  का आर्शिवाद सदैव मेरे साथ रहता है, मेरे भाईयों की एकजुटता उनकी शुभकामनाएं सदैव मेरे साथ रहती है, जिससे मुझे कभी भी किसी तरह की कमी का अहसास नहीं होता। 

आप दोनेां मंे से चैलेन्जिंग जाॅब किसे मानते है एक चेयरमैन के रूप में या फिर एक डायरेक्टर के रूप में ?

दोनों में से ज्यादा चैलेन्जिंग जाॅब मैं इंडस्ट्रियल स्टेट के चेयरमैन के पद को मानता हूँ, क्योंकि लोगों के अनुसार कानपुर का औद्योगिक स्वरूप खत्म हो चुका है, लेकिन मेरे अनुसार शहर के औ़द्योगिक स्वरूप छोटे और मध्यम वर्गीय उद्योग ने बचाया है। आज कानपुर में बड़ी इंडस्ट्रीज नहीं रही लेकिन शहर के जो 13-14 हजार छोटे उद्योग है उनकी वजह से आज कानपुर का एक अलग मुकाम है, अलग नाम है । कानपुर देश के सात राजस्व देने वाले शहरों में से एक है। यह केवल कानपुर के औद्योगिक स्वरूप की वजह से है। इसलिए मैं इसे एक चैलेन्ज मानता हॅँू और विगत 16 वर्षों से लगातार मैं यहाँ का चेयरमैन हँू, इससे पहले मैं यहाँ 6 साल डायरेक्टर के पद पर भी रह चुका हूँ।

कानपुर को पहले ‘मैनचेस्टर आॅफ इंडिया’ कहा जाता रहा एक चेयरमैन होने के नाते आप कानपुर का भविष्य कहँा पर देखते हैं, कया ये नाम कानपुर को फिर से मिल पायेगा ?

देखिए कानपुर हमेशा से मैनचेस्टर रहा है फर्क सिर्फ इतना है कि पहले यह बड़े उद्योगों के कारण था और आज छोटे उद्योगों के कारण है, आज कई बड़े ग्रुप कानपुर की ओर अपना रूख कर रहे हैं हाल ही में जे.पी. ग्रुप ने अपनी एक फैक्ट्री यहाँ पर लगाई है, लोहिया ग्रुप फिर से आने की तैयारी कर चुका है और भी कई बड़े उद्योग यहां पर आ रहे हैं लेकिन छोटे और मध्यम वर्गीय उद्योग में कानपुर का किसी भी तरह से कोई जोड़ नहीं है। 

तो आप कह सकते है कि कानपुर में अन-इंप्लायमेंट की स्थित मंे भी सुधार आयेगा जब इतने बड़े ग्रुप अपने उद्योग यहां शुरू करेंगे ?

मेरे अनुसार कानुपर मंे अन-इंप्लायमेंट बहुत कम है। आप देख सकते यहाँ के इंडस्ट्रियल एरिया की हर फैक्ट्री में बोर्ड लगा होगा कि ‘यहां लेबरों की आवश्यकता है’ हाँ, क्वालीफाईड लोगों के लिए एक बार अन-इंप्लायमेंट हो सकता है क्योंकि यहाँ बडे़ उद्योगों की कमी है, पर छोटे उद्योगों में लेबर क्लास के लिए यहां अन-इंप्लायमेंट की स्थित न के बराबर है। 

कानपुर एक औद्योगिक नगरी के नाम से जाना जाता रहा है लेकिन पिछले कुछ समय से संसाधनों को लेकर यहाँ का उद्योग प्रभावित हुआ है। आप क्या कहेंगे इस विषय में ?

यहाँ जो उद्योग प्रभावित हुए हैं वो सभी बड़े उद्योग है। यहाँ जो बड़ी-बड़ी मिलें थीं, सरकार ने उनका निजीकरण से सरकारी करण किया फलस्वरूप सभी मीलें बंद हो गयी, लेकिन विगत कुछ वर्षों से चीनी आइटमों ने यहाँ के उद्योग को प्रभावित किया है। चाईना का माल सस्ता जरूर होता है लेकिन टिकाऊ नहीं होता फिर भी हम लोग प्रयासरत है कि अगर हमारी केन्द्र सरकार व प्रदेश सरकार हमें संसाधन उपलब्ध कराये तो हम चाइना से भी कम्पटीशन कर सकते हैं। जैसे खिलौने, साइकिल पाटर््स, बल्ब आदि कई ऐसे उद्योग हैं जो प्रभावित हुए हैं अगर सरकार संसाधन उपलब्ध कराये तो हम फिर से अपना मुकाम पा सकते हैं। 

हाल ही में वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम ने बैंकों की कर्ज वसूलने की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी। इस पर देना बैंक की क्या स्थिति है और इस समस्या का उचित समाधान क्या है ?

मेरी बैंक की हर मीटिंग में यही सलाह रहती है कि हम बड़े-बड़े लोन्स के बजाय छोटे उद्यमियों को कर्ज उपलब्ध करायें। आपने सुना होगा हाल ही मंे यूबी गु्रप के विजय माल्या जी ने बैंको का 5800 करोड़ रूपये का कर्ज नहीं चुकाया, जिससे बैंकिग काफी प्रभावित हुई। इसलिए हम लोगों का यही मानना है कि एक बड़े कर्ज से ज्यादा लाभदायक है कि कई छोटे उद्यमियों को कर्ज दिया जाए। मध्यम व छोटे उद्यम को दिये गये कर्ज में डूबने की संभावना कम रहती है। हमारा देना बैंक स्माल व मीडियम स्केल के उद्योग को कर्ज देने के लिए अग्रसर है। 

हमारे माध्यम से कानपुर के उद्यमियों को कोई सन्देश देना चाहेगें ?

कानपुर के उद्यमी बहुत जुझारू हैं और कानपुर के लेबर बहुत अच्छे हैं। यहाँ के उद्यमियों में उद्यमियता कूट-कूट कर भरी हुई है। इतना कुछ होते हुए भी यहाँ पर 13-14 हजार फैक्ट्रीयाँ चल रही हैं यह अपने आप में रिकार्ड है। केन्द्र व प्रदेश सरकार से किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं है, जो उद्यम चल रहे है वे सब हमारे उद्यमियों की दम पर। यहाँ के कई उद्यमी उत्तर प्रदेश से पलायन कर उत्तरांचल, हिमांचल या वेस्ट बंगाल गये थे। पर जो कानपुर की लेबर है उसका कोई जोड़ नहीं है। वहां पर फैक्ट्रीयों में, मीलों में नेता गिरी का शिकार हुए लेबरों ने काम को लेकर बहुत धोखा खाया उनके परिजन अब यहीं पर अपनी जीविका अर्जित कर रहे है और संतुष्ट हैं आज कानपुर का जो स्माल स्केल का स्टेट्स है वो यहां के उद्यमियों व लेबर का समायोजन हैं दोनों  मिलकर कानपुर के नाम को आगे बढ़ा रहे हैं। मैं उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हॅँू और मेरा सहयोग सदैव उनके साथ है। धन्यवाद।

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