राजनीतिक मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Monday 5th of September 2016 11:49:10 PM

सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासन में कभी नम्बर दो की हैसियत रखने वाले सपा नेता रामनरेश यादव उर्फ मिनी पिछले दिनों पब्लिक आक्रोश के आमंत्रण कर कार्यालय आयें हमारे प्रबंध सम्पादक डा0 प्रदीप तिवारी की उनसे वर्तमान राजनीति परिदृश्य पर लम्बी वार्ता हुई। प्रस्तुत है वार्ता के कुछ प्रमुख अंश।


70 के दशक में राजनीति में जो भाषा बोली जाती थी आज वह कही नहीं सुनायी देती। पत्रकारिता की भाषा मे इसे शब्दों का चीरहरण कहा जा सकता है। आप का क्या कहना है। 
यह सही है कि राजनीतिक मूल्यों में गिरावट आयी है लेकिन सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि सामाज में भी इसका व्यापक असर दिखायी दे रहा है। आज हम परिवार के साथ बैठ कर कोई टीवी कार्यक्रम नहीं देख सकते। यह अच्छी बात नहीं है राजनीतिक दलों में विचारधाराओं का मतभेद होना चाहिए व्यक्तिगत आक्षेप लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। 
आपने सपा प्रमुख मुलायम सिंह और अब उनके पुत्र अखिलेश यादव का कार्यकाल देखा। दोनों में आप किसे बेहतर मानते है। 
दोनों का ही शानदार कार्यकाल रहा है और तुलना बहुत मुश्किल है अलबत्ता यदि दोनों के शासन को जोड़कर किसी अन्य दल की सरकार की तुलना करेंगे तो आपको सपा की उपलब्धियां, योजनाओं का क्रियान्वयन निश्चित रूप से औरों से बेहतर दिखायी देगा। 

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी दल अपनी तैयारियों में लगे है सपा किन मुद्दों और उपलब्धियो को लेकर चुनाव की तैयारी कर रही है। 
सपा कभी पर्दे के पीछे की राजनीति नहीं करती है हमारी नीतियां और भविष्य की योजनाएं ठोस आधार पर है और हमारी तैयारी भी उसी के अनुरूप है इस सम्बंध में एक बात कहना चाहूंगा कि एक्जिट पोल के आंकड़े विश्वास के लायक नहीं होते। एक बार इसी एक्जिट पोल ने सपा को तीन सीटे मिलने की बात कही थी तब पार्टी ने 28 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। एक बार यह लोग केवल 9सीटों पर जीत दिखा रहे थे तब हमने 39 सीटें जीती थी। इस बार यह 14 सीटों पर जीत दिखा रहे है। इस गणित के अनुसार मुझे लगता है कि सपा को 55 सीटें मिलनी चाहिए। जहाँ तक नयी पार्टियों का सवाल है तो वह आती जाती रहती हैं। 

नरेश जी क्या आपकी पार्टी मीडिया को मैनेज नहीं कर पा रही है अथवा अपनी बात सही ढंग से नहीं कह पा रही है। जिसकी वजह से सपा के प्रति निगेटिव प्रचार ज्यादा हो जाता है। 

देखिये लोकतंत्र में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है यह हमारे लोकतंत्र का चौथा खम्भा कहा जाता हैं सपा ने ही इसे सबसे पहले लोकतंत्र का चौथा खम्भा कहा था। इसलिए मीडिया को मैनेज नहीं कर पाने जैसी कोई बात नहीं है प्रख्यात समाजवादी डा0 लोहिया ने कहा था कि हमारा मीडिया मैनेंजमेंट ठीक नहीं है तो हम अपनी बात जनता तक नहीं पहुंचा सकेंगे और आप जनता की आवाज नहीं सुन सकेंगे। लेकिन दुख की बात है आज मीडिया की भूमिका चापलूसी भरी हो गयी है और यह चरम पर है। किसी भी चीज की अति खराब होती है। हम अपना काम कर रहे है। चुनाव घोषणा पत्र में किये गये वादों में 90 प्रतिशत वादे पूरे कर हमने कोई गलती तो नहीं की। 

पार्टी में कोई ऐसा प्रवक्ता नहीं है जो स्वतंत्रत रूप से मीडिया को जवाब दे सके। उसे कई बार कहना पड़ता है कि सोचकर बतायेंगे नेता जी से बात कर बतायेंगे। 
ऐसा नहीं हो सकता है कि कहीं थोड़ी भूल हो गयी हो ।

कुछ समय के लिए आपका सपा से अलगाव रहा अब पुनः पार्टी में है। क्या कारण रहा और नेता जी के साथ आपका अनुभव कैसा रहा। 
मैं नेता जी के न तो दिल से गया था और न दल से। मुझे एक भी दिन यह महसूस नहीं हुआ कि मैं सपा से अलग हूँ यह सिर्फ कागजों पर ही रहा। जहाँ तक सवाल नेताजी के स्वभाव का है तो वह बेहद सरल स्वभाव के है। उनमें लोगों को अपने साथ जोड़कर रखने की क्षमता है । मैं समझता हूँ कि जो भी नेता जी को थोड़ा भी जानता है अथवा उनके साथ रहा है वह उनके स्वभाव का कायल हो जाता है। 

रामनेरश जी आप को मिली की उपाधि ‘मिनी’ कब और कैसे मिली
(मुस्कराते हुए)! यह सवाल न तो पूछने लायक है और न बताने लायक।

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