पॉवर सेक्टर में काम करना बहुत चैलेंजिंग - सेल्वा कुमारी जे, आई.ए.एस केस्को एम.डी कानपुर

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Monday 5th of September 2016 11:06:56 PM

भारत के साक्षर प्रदेशों में से एक तमिलनाडु राज्य के चेन्नई की मूल निवासी श्रीमती सेलवा कुमारी जे ने आर्किटेक्चर से स्नातक और पब्लिक पॉलिसी से परास्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की। कॅरियर के प्रारम्भ से ही अलग-अगल सरकारी विभागों में कार्यरत रहने के बाद इन्होंने सिविल सेवा में आने की ठानी और अपने ठोस इरादों के चलते इन्होंने 2006 में आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। हमारे शहर कानपुर की केस्को एमडी श्रीमती सेलवा कुमारी जे कानपुर से पहले एटा में जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। पावर सेक्टर को अपने आप में चैलेंज मानने वाली श्रीमती सेलवा कुमारी अपने बेहतरीन कार्यप्रणाली के चलते शहर में बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। शहर की मूलभूत समस्या बिजली पर जब हमारे चीफ एडिटर डा0 प्रदीप तिवारी जी ने केस्को एम.डी. से कुछ सवाल किये तो उन्होंने अपनी प्लानिंग के चलते शीघ्र ही शहर को बिजली समस्या से निजात दिलाने का वादा किया। प्रस्तुत है उनसे इस विशेष बातचीत के प्रमुख अंश-
सेल्वा जी, आप मूलतः कहाँ की निवासी हैं और आपकी प्राइमरी व हायर एजूकेशन कहां से हुई?
मैं मूलतः तमिलनाडु राज्य से हूँ। मेरा निवास चेन्नई का है। मेरी पूरी शिक्षा वहीं पर हुई। मैंने आर्किट्रेक्चर में स्नातक और पब्लिक पॉलिसी से एम.ए. किया है।

कानपुर से पहले आप कहाँ पर पोस्टेड थीं। अपने यहां तक के सफर के बारे में भी कुछ बताएं ?
यहां पर केस्को एमडी से पहले मैं एटा की जिलाधिकारी थी। वैसे मैं 2006 बैच की पास आउट हूँ। मैंने 2-3 विभागों में सरकारी नौकरी की। सिविल सेवा में आने से पहले मैंने 2 साल तक पुलिस विभाग में भी अपनी सेवाएं दीं, मैं मुन्सिपल कमिश्नर भी रही। ये सभी सेवाएं मेरी गृह राज्य तमिलनाडु में रहीं। मैंने पुलिस की नौकरी में रहते हुए सिविल सेवा की परीक्षा दी और किस्मत ने भी मेरा साथ दिया और मैं आई.ए.एस की परीक्षा में सफल हुई।

पॉवर सेक्टर में काम करना कितना चैलेंजिंग हैं ?
पावर सेक्टर अपने आप में एक चैलेंज है, मगर इसमें स्कोप भी बहुत है। यहां पर चाहे इन्फ्रास्ट्रक्चर हो या आई.टी सभी में बहुत चैलेंज है और अ्रगर हम कन्ज्यूमर की बात करें तो उनकी समस्याओं को हल करना और उनको संतुष्ट करना तो सबसे बड़ा चैलेंज है। जैसे प्राइवेट कं0 में कस्टमर सैटिसफैक्शन को बेस बनाकर काम करते हैं, आज हमें भी अपने कन्ज्यूमर की संतुष्टि और सरकार के राजस्व को ध्यान में रखते हुए काम करना है।

  कानपुर एक संवेदनशील शहर है। यहां पर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिजली चोरी एक बड़ी समस्या है, इसे कैसे कंट्रोल करेंगी आप ?
देखिए, आज हर व्यक्ति, हर परिवार को बिजली की आवश्यकता है और सम्भवतः हर परिवार इसका प्रयोग भी कर रहा है। बिजली चोरी पर मैं कहूंगी कि यहां पर जागरूकता की भी कमी है। कानपुर का विकास किसी प्लानिंग के तहत नहीं हुआ है। अभी हम अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में जैसे-जैसे सुधार कर रहे हैं आबादी उससे भी अधिक स्पीड से बढ़ रही है। यह भी एक समस्या है। उसके बाद यहां पर जो इंडस्ट्रीज में काम करने वाले लोगों के घर है, जो घनी आबादी वाले क्षेत्र है, इन सब जगहों पर भी सिस्टेमैटिक ढंग से बिजली के कनेक्शन नहीं दिये गये हैं, पुराने बकायदारों की भी संख्या कम नहीं है, शिफ्टिंग पाप्यूलेशन भी है। तो ऐसे कई कारण हैं यहां बिजली चोरी के।

अधिक समस्या किसमें है, वर्तमान राजस्व या पुरानी बकायेदारी ?
हमें तो लोगों को दोनों तरीकों से हैन्डिल करना पड़ेगा क्योंकि हमारा बकाया भी बहुत है और जो हमारा बेस है वो जितना बढ़ेगा जितने लोग बढ़ेगें, उतना हमारा, रेवेन्यू भी बढ़ेगा। हम एरियर्स को पक्का रेवेन्यू मान कर नहीं चलते, उसमें 50 प्रतिशत तक वसूली हो जाये तो बहुत अच्छा है। लेकिन भविष्य के लिए हम प्लान कर सकते हैं और आज की डेट में जितनी आबादी है उसको हम नेट पर ले जा सकते है। तो हमें दोनों के लिए ही काम करना है चाहे वो वर्तमान राजस्व हो या पुरानी बकायेदारी। लेकिन किसी भी स्थिति में कन्ज्यूमर का हैरिसमैंट नहीं होना चाहिए।

बिजली चोरों के खिलाफ अभियान में बहुत से लोग पकड़े गये, जो मीटर में छेड़छाड़ कर बिजली चुराते थे, लेकिन यहाँ ऐसे भी तमाम क्षेत्र हैं जहाँ मीटर के बिना ही हीटर चल रहें हैं। उसके लिए क्या प्लानिंग है ?
मेरे लिए दोनों ही समस्याएं प्राथमिक है, लेकिन हम नए कनेक्शन पर ज्यादा फोक्स कर रहे हैं। अभी हमने 30 हजार कनेक्शन का टारगेट भी दिया है। इन सब के साथ हमारे यहां एक समस्या और है कि यहां पर फीडर वाइज या ट्रांसफार्मर वाइज मीटरिंग नहीं है जिससे हम बिजली की खपत को डिवीजन वाइज तो देख पा रहे हैं, लेकिन ट्रांसफार्मर वाइज देख पाना अभी बहुत मुश्किल है। इससे निपटने के लिए हमने एक प्लानिंग की है जिसमें हर डिवीजन में हर महीने एक फीडर को हम ठीक करेंगे। हमारे पास 18 डिवीजन है, धीरे-धीरे जब सभी फीडर सिस्टेमैटिक हो जायेगें तब क्षेत्र के अनुसार बिजली चोरी का सही-सही पता लगाने में आसानी होगी।
इंडस्ट्रीज में बिजली चोरी पर विभाग की संलिप्तता पर क्या कहेंगी आप ?
मैं यह तो नहीं कह सकती की इंडस्ट्रीज में बिजली चोरी नहीं होती। लेकिन वहां चोरी का तरीका कटियाबाजी वाला नहीं होता। विभाग की संलिप्तता पर मैं यह कहना चाहूंगी कि ऐसी किसी भी प्रकार की सूचना हो तो सीधा मुझे इससे अवगत कराएं।

विभाग के लोगों की  संलिप्तता पर सजा का क्या प्रावधान है और उनकी शिकायत कहाँ और किससे की जा सकती है ?
डेफिनेटली, जो भी इसमें लिप्त है सजा के हकदार हैं। हमारा हेल्पलाईन नं0 1912 जो हमारे कॉल सेन्टर का है, बिजली चोरी और किसी भी प्रकार की शिकायत कन्ज्यूमर इस नं0 पर दर्ज करा सकते हैं। हमारी वेब साइट पर भी कम्पलेन करा सकते हैं और सीधा हमारे नं0 पर भी व्हाट्स एप पर बिजली चोरी या कोई भी इससे सम्बन्धित समस्या भेज सकते हैं। जिस पर हम तुरन्त कार्यवाई करते हैं। लेकिन मैं एक बात और कहूंगी की जनता को आज बेस्ट सर्विस के लिए डिमांड करनी चाहिए। कॅरप्शन एक तरफ से नहीं होता, इसमें देने वाला और लेने वाला दोनों ही गलती करता है और तभी कॅरप्शन को बढ़ावा मिलता है। जब तक आप देते रहेंगे लेने वाला लेता रहेगा।

सरकारी विभागों की बकायदारी पर आप क्या कर रही हैं ?
मैंने जब से कानपुर में ज्वाइनिंग की, तभी से मैंने सरकारी बिल्डिगंस में मीटर लगाने का काम शुरू करवाया और यह कार्य निरन्तर प्रगति पर है और शीघ्र ही सभी सरकारी बिल्डिंगस में मीटर होंगे। इसके अलावा जो कुछ विभागों का पुराना बकाया है जैसे नगर निगम, जल निगम आदि इन सभी में अधिकारियों से हमारी लगातार मीटिग्ंस हो रही है, जिसके फलस्वरूप बकाया राशि जल्द ही हमारे रेग्युलर बजट में एडजस्ट हो जायेगी।

शहर में 43 थाने है, शायद ही किसी में मीटर लगा हो। क्या इससे राजस्व का नुकसान नहीं होता ?
(मुस्कुराते हुए) वहां पर भी हम काम कर रहे हैं, और जल्द ही सभी थानों मेंं मीटर होगें। वैसे हम अभी फिक्स रेट से उनसे पैसा लेते हैं। और पुलिस विभाग भी हमारे साथ कॉपरेट करता है।

यहां प्राइवेट कं0 के मीटर रीडर होने से सर्विस में भी कॉफी समस्या है। इसको कैसे ठीक करेगीं आप ?
हम इस पर बराबर काम कर रहे है अभी कल ही हमने दो एफआईआर कराये हैं मीटर रीडिंग एजेन्ट्स के खिलाफ। साथ ही जो रीडिंग को लेकर खेल चल रहा है इसके लिए हमने एक व्यवस्था शुरू की है, जिसमें नयी एजेंसियों के द्वारा मीटर रीडिंग की फोटो ली जाएगी और यह जीपीएस सिस्टम पर बेस होगा। इसको पायलट बेसिस पर हम नवाबगंज एरिया से फरवरी में ही शुरूआत करेगें। और फरवरी से ही हमने अपने कर्मचारियों के लिए यूनिफार्म और आई कार्ड भी अनिवार्य कर दिया है जिसका मैं खुद इन्सपैक्शन करूंगी। इससे काफी हद तक दलालों की पकड़ हो सकेगी।

हमारे माध्यम से उपभोक्ताओं को कोई संदेश देना चाहेगीं ?
उपभोक्ता से मैं यही कहना चाहूगीं कि दलालों के चक्कर में बिल्कुल न पड़े। अपना काम स्वंय करायें और अगर किसी भी तरह की समस्या आती है तो हमारे कस्टमर केयर 1912 पर कॉल करें या सीधा मुझसे सम्पर्क करें। हम आपकी समस्याओं को सुनने के लिए ही बैठे हैं। 

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