पुलिस, के.डी.ए और पी.डब्लू.डी मिलकर बनाएं शहर विकास की योजनाएं के.एस.इमैनुअल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक क

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Thursday 11th of December 2014 05:32:03 PM

शासन और प्रशासन के बीच बेहतरीन सामंजस्य बनाकर और कानपुर शहर में अपनी अनूठी कार्यशैली से जनता के समक्ष पुलिस की मित्र छवि पेश कर एक मिसाल कायम करने वाले हैदराबाद के मूल निवासी कट्टारपू सुनील इमैनुअल अपने पिता रिटायर्ड आई.ए.एस ऑफिसर श्री के.आर.डब्ल्यू येसुदास को अपना प्रेरणास्त्रोत मानते हैं। हैदराबाद से ही प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण कर इन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ एकोनॉमिक्स, नई दिल्ली से सोशलॉजी में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। 2003 बैच के आई.पी.एस ऑफिसर श्री इमैनुअल मानते हैं कि शहर की डेवलपमेंट अथॅारिटी और पीडब्लूडी शहर के विकास के लिए कोई भी योजना बनाते समय यदि ट्रैफिक पुलिस को भी सम्मलित करें, तो शहर की यातायात व्यवस्था को कॉफी हद तक सुचारु रुप से चलाया जा सकता है। इस माह के हमारे खास मेहमान रहे श्री के.एस.इमैनुअल रु-ब-रु हुए हमारे चीफ एडिटर डा0 प्रदीप तिवारी जी से। प्रस्तुत है उनकी बातचीत के प्रमुख अंश -


सर, आपकी प्रारम्भिक शिक्षा कहाँ से हुई और आपका मूल निवास कहाँ का है ?
मैं मूल रूप से हैदराबाद का निवासी हूँ और मेरी स्कूलिंग भी हैदराबाद से ही हुई है। मैंने (एम.ए) मास्टर डिग्री नई दिल्ली के देहली स्कूल ऑफ एकोनॉमिक्स से प्राप्त की है।
आपको प्रशासनिक सेवा में आने की प्रेरणा कँहा से मिली। क्या आपके परिवार में कोई प्रशासनिक सेवा में है? 
मेरे फॉदर रिटायर्ड आईएएस आफिसर हैं, उन्ही से मैंने प्रेरणा लिया है और वही मेरे प्रेरणा स्त्रोत हैं। उन्ही के मोटिवेशन से मैंने सिविल सर्विसेज की तैयारी की और सिविल सेवा में चयनित होने में सफल हुआ।
कानपुर से पहले आपकी पोस्टिंग कहाँ पर रही ?
कानपुर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर ज्वाइनिंग से पहले मैं सेन्ट्रल डेप्युटेशन (एनआईएमए) में था उससे पहले मेरी पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में एस.पी. (जीआरपी) के पद पर थी।
कानपुर व्यवसायिक दृष्टि से एक बहुत बड़ा शहर है, जिसके कारण यहाँ अपराध भी अधिक है। यहां पर किस तरह का क्राईम आपको ज्यादा देखने को मिला ?
देखिए! अपराध तो हर जिले में है, कहीं कम कहीं ज्यादा। सभी जगह अलग-अलग तरह के अपराध हैं। कानपुर के बारे में कहूँ तो यहां आप अगर क्वान्टटी ऑफ क्राईम देखेगें तो सबसे ज्यादा प्रापर्टी रिलेटेड क्राईम है। यहां सबसे ज्यादा 406, 420 के मुकदमे लिखे जाते हैं। यहां लोगों में मकान मालिक-किरायदारों को लेकर विवाद है। प्रापर्टी पर कब्जे को लेकर विवाद है। इसके बाद अगर कहें तो यहां लूट, मर्डर, चेन स्नेचिंग के भी केस होते हैं। 
मिश्रित आबादी के कारण कानपुर एक संवेदनशील शहर भी है। इसकी वजह से पुलिसिंग में भी काफी समस्याएं आती है। इसे आप कैसे हैंडिल करते है ?
इसके लिए वो सारे एरिया जो कि संवेदनशील हैं पहले से ही आइडेंटिफाई किये जाते है। वहां तैनात पुलिस ऑफिसर को ये पहले ही बता दिया जाता है कि किस प्रकार से ऐसे क्षेत्र में पुलिसिंग करें। वो भी इस बात को लेकर संवेदनशील रहते हैं। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में हम लोगों ने एसपीओ बनाये हैं, पुलिस मित्र बनाये हे, पीस कमेटी बनायी गयी हैं। इन सबके माध्यम से समय-समय पर मीटिंग चलती रहती है और फिलहाल अभी तक इस तरह की कोई प्राब्लम नहीं आयी है।
शहर की जनता के लिए आज ‘यातायात’ की समस्या बहुत बड़ी है। जिसके लिए संसाधन भी सीमित है। हर प्रमुख चौराहों पर रोज जाम देखा जा सकता है। इससे निपटने के लिए अभी यातायात माह का भी आयोजन किया गया जिसका कुछ खास असर नहीं पड़ा। क्या कहेंगे इस पर घ्
इस समस्या पर मैं सबसे पहले एक ही बात कहूँगा कि पब्लिक के अन्दर जो ट्रैफिक सेन्स होना चाहिए वो बिलकुल भी नहीं है और यहाँ पूरे शहर की आबादी करीब 50 लाख की है तो अगर पब्लिक सहयोग न करे तो इस समस्या से निजात पाना बहुत ही मुश्किल है। हम कितना भी ट्रैफिक कन्ट्रोल करें, कितना भी चालान काटंे, लेकिन जब तक पब्लिक कॉपरेट नहीं करेगी तो इस चीज से निकलना बहुत मुश्किल है। यहाँ ज्यादातर व्यक्ति ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं चाहे वो बिना हेलमेट गाड़ी चलाने की बात हो या फिर गलत और बिना नम्बर प्लेट की। बिना उनके सहयोग के इस समस्या से निकल पाना संभव नहीं है। फिर भी अभी हमने ट्रैफिक माह के दौरान नियमों की जागरुकता के लिए शहर के सभी चौराहों पर माइक्रोफोन्स सिस्टम लगाकर जनता को जागरूक करने की कोशिश की है।
ठंड का मौसम शुरु होते ही यहाँ सुबह के वक़्त काफी घटनाएं होती है। पुलिस रात में तो ड्यूटी पर रहती है, मगर तड़के सुबह के समय पुलिसिंग कम हो जाती है जिससे चैन स्नैचिंग जैसी कई समस्यायें देखने को मिलती है ? क्या इसके लिए आपने कुछ प्लानिंग की है?
देखिये, जितनी पुलिस फोर्स रात में रहती है, लगभग उतनी सुबह भी होती है। शहर की जनता के लिए हमारी पुलिस डायल 100 पर 24 घंटे उपलब्ध रहती है। वैसे हम लोगों ने इस समस्या से निपटने के लिए एक व्यवस्था बनाई है, कि सुबह के समय जब मॉर्निंग वॉकर्स निकलते हैं उस वक्त जितने भी ऑफिसर्स रहते है ड्यूटी पर उनको लेकर कुछ चिन्हित मार्गों व चौराहों पर एक विशेष टीम भी लगाई है, जहां पर ज्यादा इस तरह की लूट स्नैचिंग वगैरह होती है।
यहाँ पर आपने देखा होगा कि लोग अपनी दुकानों को आगे बढ़ाये हुए हैं। चूंकि यातायात पुलिस तो हर जगह पहुंच नहीं पायेगी तो क्या सम्बन्धित थानों की जिम्मेदारी नहीं है कि लोग रोड पर गाड़ी न खड़ी करें ?
ट्रैफिक और अतिक्रमण के सम्बन्ध में लोगों में ये गलत-फहमी है कि हर चीज पुलिस ही करे। सबसे पहले इस समस्या को तो दुकानदारों को ही दूर करना चाहिए। दुकानदार या और भी कोई जो अतिक्रमण कर रहा हो उसे जागरुक होना चाहिए और अगर कोई दुकानदार अपने दुकान के सामने अतिक्रमण कर रहा है तो इसमंे नगर निगम भी जिम्मेदार है। ये केवल पुलिस प्राब्लम नहीं है। कानपुर शहर में जो संस्थायें हैं डेवलपमेंट अथॅारिटी, पीडब्लूडी है, इन लोगों की जब भी कोई योजना बनती है चाहे वो सड़क बनाने की योजना हो, शहर को सुधारने की योजना हो या फिर किसी भी प्रकार की खुदाई की, इसमें ये ट्रैफिक पुलिस को कभी भी सम्मलित नहीं करते हैं, ये सबसे बड़ी कमी है। मैं ये मानता हँू जो भी विभाग इस तरह की योजना बनाते है, उसमें उन्हें ट्रैफिक पुलिस को भी सम्मिलित करना चाहिए, जिससे कि हर एक बिन्दु पर गहन चर्चा हो और ट्रैफिक सुचारु रुप से चल सके।
आपके जो अधिकारी है, या आपके जो अन्डर में है उनका ताल-मेल कैसा है ?
हमारा तालमेल बहुत ही अच्छा है। हम लोग बिल्कुल एक टीम की तरह काम करते हैं। हमारी टीम बहुत स्ट्रांग है, बहुत मजबूत है।
कानपुर शहर की जनता के लिए कोई सन्देश हमारे माध्यम से देना चाहेंगे ?
मैं जब पहली बार कानपुर शहर आया था, तो मैनें देखा कि यहाँ पर सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक की है, इसलिए मैं आपके माध्यम से शहर की जनता को यही संदेश देना चाहूँगा कि ट्रैफिक के नियमों का पालन करें, उल्लंघन नहीं करे। वो इस बात को भी समझें कि अगर हम कोई व्यवस्था लागू करते हैं, तो वो पब्लिक की सुरक्षा के लिए ही होती है। पब्लिक सर्विस ही हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

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