न दूसरा गुलाबी गैंग था न बनेगा - संपत पाल

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Monday 31st of August 2015 05:29:01 PM


गुलाबी साड़ी पहने और लाठी से लैस, 55 वर्षीय संपत पाल और उनका ‘गुलाबी गैंग’ आज भ्रष्ट पुलिसकर्मी, कुटिल राजनीतिज्ञों, लापरवाह प्रशासनिक अधिकारी और महिलाओं का अपमान करने वाले पुरुषों के लिए नकेल बन चुका हैं। अभी तक इस असाधारण महिला ने भारत में 20,000 से ज्यादा पीडि़त महिलाओं को गुलाबी गैंग से जोड़ा है, जो बहुत कम समय में जमीनी स्तर पर महिलाओं के उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ लड़ रही महिलाओं का एक सजग समूह बनकर उभरा है। तमाम समस्याओं को अनदेखा कर और समाज में महिलाओं के वर्चस्व को लेकर कुछ कर गुजरने के जुनून ने संपत पाल को आज विदेश तक में पहचान दिलायी। गत माह हमारे स्टूडियो आयीं संपत पाल ने एक खास मुलाकात में हमारे चीफ एडिटर डा0 प्रदीप तिवारी से साझा किये अपने गांव से लेकर बिग बाॅस के घर में बिताये पल। प्रस्तुत है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश -
सम्पत जी आप कहां की निवासी हैं और आपके परिवार के कौन-कौन है ?
मेरी ससुराल चित्रकूट के एक गाँव रउली कल्यानपुर की है, यह क्षेत्र पहले बाँदा में आता था और मेरा मायका जिला बांदा के बिसंडा गांव के पास एक छोटे सी जगह कैरी का है। मेरे परिवार में मेरे ससुर के अलावा मेरे चार बेटी व एक बेटा है। चारों बेटियों और बेटे की शादी हो गयी है और 2011 में मेरा बेटा ग्राम प्रधान हुआ है। 
आपने गुलाबी गैंग की शुरूआत कैसे की ?
मुस्कुराते हुए, ‘‘देखिये, गुलाबी गैंग बहुत पहले नहीं बना था। उस वक्त हम 20 साल की थीं 12 साल में हमारी शादी हो गयी थी और 15 साल में हमारा गउना हुआ तो हम ससुराल आ गयीं। हमारी सास खान-पान में भेद भाव रखती थीं, उनका कहना था कि औरतों को बाद में खाना चाहिये पुरूषों को पहले। वो चीजें हमेें अच्छी नहीं लगीं और गुस्से में जिद के मारे मैं रोज पहले खाना खाने लगी। फिर धीरे-धीरे मैंने अपने पूरे परिवार को समझाया जिसके बाद हमारा बंटवारा हुआ और धीरे-धीरे मैं और आगे बढ़ने लगी। एक बार अपने पति से मेरी बहस हुई तब मैनें कहा औरत चाह ले तो कोई गैर आदमी छू नहीं सकता औरत चाहे तो आग लगा दे। हमारे ठेकेदार आप नहीं मैं खुद अपनी ठेकेदार हँू। वहीं कुछ घरों में औरतों से मारपीट तक होती थी इन बातों को लेकर मैं उनके यहां भी दखलनदाजी करने लगीे। और तभी अपने ससुराल से ही पाँच महिलाओं ने मिलकर एक संगठन बनाया। वहीं से गैंग की शुरुआत हुई।’’
 कितना संघर्ष करना पड़ा गैंग शुरु करने के लिए ?
काफी संघर्ष किया हम लोगों ने। एक बार गांव में एक आदमी अपनी पत्नी को बहुत मारता था जिसको समझाने की हम लोगों ने कोशिश की तो उसने हमें गाली दे दी। एक दिन हम लोग गए और उस आदमी को गिरा के उसकी खूब धुनाई की और फिर बताया की आज के बाद अपनी औरत को मारना नहीं। इसको देखकर गांव की तमाम महिलाएं अपने ऊपर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने लगी। पहले 5 - 10 महिलाएं आती थीं अब तो हजारों महिलायें साथ हैं और रोज अलग-अलग जगहों से सैकड़ों केस आने लगे हैं।
आपका यह गैंग कितना पुराना है और इसका नाम गुलाबी गैंग कैसे पड़ा ?
पहले नाम नहीं सोचा था जब हजारों महिलायें आने लगी तब 2003 में एक संस्था का रजिस्ट्रेशन कराया ‘‘आदिवासी महिला उत्थान ग्राम उद्योग सेवा- जब महिलाओं की संख्या बहुत बढ़ने लगीं, तो हमने स्वंय सहायता समूह बना दिया। एक बार हम लोग एक मीटिंग के लिए बाहर जा रहे थे कि हमारे साथ की एक बुढि़या रेलगाड़ी में कहीं खो गयी, काफी दिक्कतों के बाद वो मिलि। उसी दिन से हमने सोचा की हम एक ड्रेस चुनेंगे , फिर ड्रेस के लिये सभी महिलाओं से 100-100 रूपये जमा करवाये और कानपुर के जनरलगंज बाजार गयी। जहां तमाम रंग और डिजाइन देखने के बाद हमें एक गुलाबी दुपट्टा दिखायी पड़ा। गुलाबी रंग किसी पार्टी से भी नहीं मिलता था तो हमने इसी रंग की साडि़यां खरीद लीं। एक बार गांव में सड़क मरम्मत के लिये लोगों ने ज्ञापन दिया पर अधिकारी कुछ नहीं सुनते थे। तो हम लोग वही गुलाबी साड़ी पहनकर अधिकारी से मिलने गये। लेकिन उनके विभाग के लोगों ने हमें मिलने नहीं दिया तो सभी महिलायें ‘गुलाबी गैग जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगीं। आक्रोशित महिलाओं ने उक्त अधिकारी जी.सी. पाण्डे को उसी टूटी सड़क पर 3 किमी तक पैदल चलाया तो फिर उसने भी माफी मांगी। वो पहला कार्यक्रम था। उसी दिन से बेहतर गैंग चला। 
क्या आपके ‘गुलाबी गैंग’ का रजिस्ट्रेशन हो गया है ?
गैंग शब्द के कारण ‘गुलाबी गैंग’ के नाम से रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा था। तो हमने वहाँ मौजूद अधिकारी को बताया कि हम ईमानदारी व समाज सेवा का काम करते हैं जिसके लिए हमें गवर्नर बी0 एल0जोशी जी द्वारा , भारत ज्योति व कई अन्य अवार्ड भी मिलें है। लेकिन ‘गैंग’ शब्द की वजह से दिक्कत हो रही थी तो हमने इसमें संसोधन किया और ‘गुलाबी समिति’ के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया और आदिवासी महिला उत्थान ग्राम उद्योग सेवा को इसकी शाखा बनाया और उसी के नेटवर्क को ‘गुलाबी गैंग’ नाम दिया जो आज उत्तर प्रदेश के कई जिलों में है जैसे फर्रूखाबाद, उन्नाव, कानपुर, मुज्जफ्फर नगर आदि। 
गैंग के नाम को लेकर कुछ विवाद उठ रहे हैं ये कैसे मैनेज करती हैं,क्या कुछ मुकदमें भी चल रहें हैं गैंग को लेकर ?
नहीं कुछ खास नहीं , ये तीन लोग हैं जय प्रकाश शिवहरे, सुमन चैहान और मिट्ठू देवी है। जो पहले हमारे साथ थे पर गलत काम और आचरण के चलते हमने इन्हंे निकाल दिया है और इन पर एफआईआर भी करवा दी है। ये लोग गुलाबी गैंग के नाम से फर्जी वेबसाइट भी चला रहे हैं और गलत तरीके से डोनेशन भी ले रहे हैं। जल्दी ही इन्हे जेल होगी। 
आपने जिला स्तर पर काम किया और गुलाबी गैंग बन गया लेकिन इसकोे नेशनल फेम कैसे मिली ? तकलीफ से या अच्छे से मिली। 
तकलीफ को कभी मैंने देखा नहीं, हमनंे सब कुछ त्याग दिया, न मरने से डरी न परिवार छोड़ने से, जीवन में मुश्किलें तो मिलती ही हैं, लेकिन मैं निडर थी। हमारे गैंग के काम की आवाज बहुत दूर तक गयी और 2008 में फ्रांस के एक पब्लिशर के बुलावे पर मैं फ्रांस गयी जहाँ उन्होनें मेेरी ‘सम्पत पाल’ पर लिखी एक किताब का विमोचन किया। जी वो फ्रेंच भाषा मंे है। कई और जगहों पर भी उसका विमोचन हुआ जिसमें इटली, स्पेन, पुर्तगाल व स्वीडन प्रमुख हैं और हाल ही में उसका अंग्रेजी भाषा में दिल्ली में भी विमोचन हुआ है। 
आपसे इसकी परमीशन ली होगी, क्या कुछ राॅयलटी भी मिलती है आपको ? 
परमीशन तो ली थी पब्लिशर ने और राॅयलटी भी मुझे लिखकर दी गयी थी, लेकिन पैसा 2-3 बार ही मिला है। जिसकी जाँच के लिए लिखा है मैनें। मेरा एक ट्रांसलेटर था तापस चक्रवर्ती लखनऊ का था जो मेरे साथ विदेश भी गया, उसने शिशिर नाम के लड़के के साथ मिलकर मेरे साथ धोखाधड़ी की। इसके पीछे भी इन्हीं दोनों का काम लगता है।
आप बिगबाॅस में गयी वहां से आपको बहुत फेम मिला, मुम्बई कैसी लगी आपको और वहां किससे-किससे मिलीं ?
मैं तो अनजाने में पहुंची, मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी, मैंने तो कभी देखा भी नहीं था। हमको वहाँ अच्छा लगा लेकिन कुछ लोग फिल्म से सीखते है और कुछ उसे देखकर गलत भी करते है। लेकिन लोगों को चाहिये की वे अच्छा करें। वहां पर सलमान खान, आमिर खान, शबाना आज़मी, तुषार कपूर और बहुत लोग मिले। सलमान बहुत ज्यादा अच्छा लगा, बहुत अच्छा लड़का है।
आप बिग बाॅस में कंटस्टेंट रहीं, कैसा लगा आपको ?
बिग बाॅस की फिल्मी दुनिया बिल्कुल ड्रामा है। सब बकवास है, बिजनेस है। हम वहाँ गये हमको सब लोग जान गये। क्योंकि कलर्स में हमको दिखाया गया। वहां के लोग हमको देहाती समझते थे हम उनको नाचने गाने वाला समझती थी। उनको अपने आप में गर्व है और हमको अपने आप में। 
बिग बाॅस में आपसी बातचीत को हू-ब-हू दिखाते हैं क्या ?
बिलकुल नहीं, बहुत कटिंग होती है। उसमें बकवास के अलावा कुछ नहीं दिखाते। मैंने गुलाबी गैंग के बारे में बताया, एक गाना भी गया था लेकिन कुछ नहीं दिखाया था।
अभी हाल ही में एक फिल्म आयी है ‘गुलाब गैंग‘ इसको लेकर कोई केस भी किया है आपने ? 
मैं टी.वी तो देखती नहीं, मुझे मीडिया के द्वारा पता चलता था। लेकिन मैं जान नहीं पाती थी जब ट्रेलर दिखाने लगे तब मैं दिल्ली पहुंची और उसको रोका। फिल्म एक दिन के लिये रिलीज होने से रुकी मगर दूसरे दिन उन्होंने अपील की और फिल्म रिलीज हो गयी फिर मैं रिकार्ड लेकर गयी। मीडिया वालों ने भी कहा कि क्यों रोका और पब्लिसिटी मिलती तो मैंने कहाँ इनका नाम अनुभव सिन्हा है और थोड़ा सा अनुभव लगा लेते तो हमसे परमीशन लेकर बनाते। अभी केस चल रहा है। 
क्या कभी भविष्य में राजनीति में भी आने की इच्छा है आपकी ?
जी बिलकुल, मैं एक बार निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में ठोकिया की माँ के खिलाफ विधान सभा का चुनाव लड़ भी चुकी हँू और अगर किसी पार्टी से टिकट मिला तो जरुर लड़ूगीं।
हमारे माध्यम से आज के नवयुवक और नवयुवतियों को क्या सलाह देना चाहेगीं ?
मैं ये संदेश देना चाहती हँू की आगे वाली पीढ़ी युवाओं पर डिपेन्ड है और ये बिगड़ जायेगें तो हमारा देश बिगड़ जायेगा और हम इन्हें भरपूर आर्शीवाद देते हैं की आज के युवा अच्छे सस्ंकार बनायें और देश का नाम ऊँचा करें।

 

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