जनता का हम पर भरोसा ही हमारी उपलब्धि हैै- आशुतोष पांडेय आई.जी.जोन-कानपुर

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Monday 10th of November 2014 04:22:56 PM

पटना के सेंट जेवियर स्कूल से स्कूलिंग व साइंस कॉलेज से इण्टर की पढ़ायी पूरी करके बिहार कालेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजूएशन के बाद बिहार में सिविल सेवा के क्रेज के चलते आपने भी सिविल सेवा में कॅरियर बनाने की ठान ली। सिविल सेवा में आने के बाद आप परिवार के लिए भी प्रेरणास्त्रोत साबित हुए और आप के बाद आपके अनुज का महाराष्ट्र कैडर में चयन हुआ। लखनऊ में एसएसपी/डीआईजी/आईजी व आगरा में आईजी जोन के पद पर रहने के बाद श्री आशुतोष पांडेय आज बतौर आईजी जोन कानपुर में अपनी सेवाऐं दे रहे हैं। पुलिस पर जनता के विश्वास को और मजबूत बनाने के लिए शहर में ‘प्रोजेक्ट आईना’ की बेहतरीन पहल करने वाले श्री आशुतोष पांडेय अपनी अलग कार्यप्रणाली के चलते शहर के चर्चित ज्योति हत्याकांड जैसे कई पेचीदा केसों को हल कर जनता के प्रति एक बार फिर विश्वास कायम करने में सफल साबित हुए हैं। अपने विस्तृत कार्यक्षेत्र में व्यस्त होने के बावजूद श्री पांडेय ने ‘पब्लिक आक्रोश’ को अपना महत्वपूर्ण समय दिया। प्रस्तुत है हमारे चीफ एडिटर डा0 प्रदीप तिवारी से उनकी बातचीत के प्रमुख अंश-

सर आप कहां के रहने वाले हैं और आपकी प्रारम्भिक शिक्षा कहां पर हुई ?
मैं मूलतः बिहार का रहने वाला हँू और बिहार के ही पटना जिले में मैंने प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण की। सेंट जेवियर से मेरी स्कूलिंग हुई, फिर साइंस कॉलेज से इण्टर किया और फिर बिहार कालेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में मैंने ग्रेजूएशन किया।

आप सिविल इंजीनियरिंग से स्नातक हैं,फिर सिविल सेवा मंे आने की प्रेरणा कहां से मिल गयी ?
पहली बात तो ये मान लीजिए कि बिहार में सिविल सेवा का बहुत क्रेज है, जो भी व्यक्ति वहां पढ़ाई करता है वो आईएएस, आईपीएस बनने की जरुर सोचता है इसलिए जो लोग इस सर्विस में आ सकते है वो जरुर ट्राई करते हैं इसमें दूसरी सबसे अच्छी बात लगी कि उस समय पटना में एक एसपी सिटी थे जिनकी पर्सनाल्टी से हम लोग बहुत प्रेरित थे। 

क्या आपके परिवार मंे भी कोई सिविल सेवा में रहा है ?
नहीं! मेरे परिवार में हमसे पहले कोई सिविल सेवा मंे नहीं रहा। हमारे पिता जी पीडब्लूडी में चीफ इंजीनियर थे लेकिन हमारा छोटा भाई महाराष्ट्र कैडर में आईपीएस हुआ है छोटी सिस्टर की शादी हो चुकी है और हमारे बहनोई भी मध्य प्रदेश कैडर में हैं।
कानपुर से पहले आपने कहाँ पर अपनी सेवाएं दीं ?
कानपुर से पहले मैं आईजी जोन आगरा में था उससे पहले मैं एसएसपी- डीआईजी- आईजी लखनऊ में था।

कानपुर क्राइम को देखते हुए एक महत्वपूर्ण शहर है, क्राइम तो सभी जगह होते है। आप यहां पर ज्वाइनिंग से लेकर अब तक क्या स्थिति में कुछ परिवर्तन देखते है ?
अगर कानपुर के क्राइम की बात करें तो कानपुर को जब हम आगरा और अलीगढ़ जैसे शहरों से कम्पेयर करते है तो यहाँ पर क्राइम बहुत कम है। इससे यह लगता है कि यहाँ के लोग इम्पलॉएड हैं और आम जनता को यहाँ रोजी, रोटी की समस्या नहीं है। मैंने कुछ जानकारी भी की थी कि यहाँ ज्यादातर लोग रेडीमेड गारमेन्ट के कारोबार से जुड़े हुये हैं। मैं समझता हूूं कि यहां पर इम्पलाएमेंट एवेन्यूज बहुत ज्यादा है जिसके चलते यहां अपराध अन्य शहरों की अपेक्षा कम है। यहां जो अपराध हैं वो ज्यादातर मॉर्निंग वॉक के समय, बच्चों को स्कूल से वापस लाते वक्त, शाम को मार्केटिंग के समय  चेन स्नेचिंग, पर्स स्नेचिंग जैसे छोटे अपराध होते हैं। 2 - 3 महीनें में 5 - 10 लाख रूपयों की लूट की कुछ एक घटनाएं होती है। तो हमारी जो प्राथमिकता है कानपुर नगर में इन अपराधों को रोकने के लिये है।

आजकल महिलाआंे से छेड़छाड़ की घटनाएं या मोबाइल फोन पर, नेट पर उनसे असभ्य भाषा में बात करने जैसे अपराध भी बढ़ते जा रहे है जिसको थाने स्तर पर अनसुना कर दिया जाता है। जिससे पीडि़तों को न्याय के लिये आपसे सम्पर्क करना पड़ता है। क्या इसको थाने स्तर पर ही नहीं सुधारा जा सकता ?
थाने स्तर पर ये मुकदमा जरूर कायम होना चाहिए और थाने स्तर पर पुलिस की संवेदनशीलता होनी चाहिए और आम जनता के प्रति जो मानवीय सवंेदना है वो उनको दिखानी चाहिए। उसमे अभी सुधार की आवश्यकता है। हम लोग कोशिश करेंगे कि इसमें जल्द से जल्द सुधार हो।

ज्योति मर्डर केस पुलिस के लिये बड़ी चुनौती थी इसको कितना सफल मानते है कि हम अपराधी को सजा दिला पायेंगे और किस स्तर पर इसकी विवेचना कर रहे है ?
सजा के लिये कोर्ट में ट्रायल होगा और ट्रायल के दौरान पक्ष इतनी बारिकी से साक्षों को इतने ठोस तरीके से प्रस्तुत करता है। लेकिन मैं समझता हूं कि जिस तरह से पुलिस ने इसमें  कारवाई की है वो बहुत ही अच्छा है। इससे केवल कानपुर पुलिस ही नहंी, उत्तर प्रदेश पुलिस का राष्ट्रीय स्तर पर व जनता में पुलिस के प्रति पूर्ण विश्वास मंे इजाफा हुआ है।

ज्योति हत्याकांड जैसे क्राइम तो आप देखते रहते हैं हालांकि ये भी घटना छोटी नहीं थी। लेकिन इसके अलावा कोई ऐसी घटना जिसको आप शेयर करना चाहते हैं ?
इसी तरह की घटनाओं से तो अकसर सामना होता रहता है। अभी हाल ही में लखनऊ में देखा गया था, जो मेहर भार्गव हत्याकांड हुआ था और इस कांड में भी इसी तरह का पब्लिक मंे आक्रोश था वहां भी कैण्डल मार्च हुआ था, इसको भी हम लोगों ने वर्कआउट किया था। इसी तरह से आगरा में नेहा शर्मा कांड हुआ था ऐसे केसों मंे पुलिस जो अपनी तत्परता दिखाती है इससे पुलिस की छवि बनती है और पुलिस व जनता के प्रति विश्वास कायम होता है। 

सर अधिकारियों से सामंजस्य एक बड़ी समस्या है, इस पर आपके क्या विचार हैं ?
हमने इस चीज पर विशेष गौर किया कि हम लोग बहुत कम अधिकारी हैं जो रेंज और डिस्ट्रिक के जोन स्तर पर हैं मेरे अनुसार उनमें एक तालमेल होना चाहिए, ये एक- दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखें और कोई काम ऐसा न हो कि हम अपने अधिकारियों को थोपे। और हमारे अधिकारी भी बहुते अच्छे व व्यवहार कुशल हैं। एक बात और जिला एसएसपी का होता है, इनकी मदद करने के लिये हम लोग है ऐसे कभी एसएसपी को नहीं लगना चाहिए कि हम उस पर अपने आदेशांे को थोप रहे है या मनवा रहे है । और हम लोग बहुत ही लकी है जो हमंे एक अच्छे एसएसपी मिले है। जो बहुत ही व्यवहार कुशल हैं।

सर, शहर में व हाई-वे पर सड़क किनारे तमाम होटल्स व शराब की दुकाने हैं जिनमें शाम होते ही खुले आम शराबियों की महफिलें सज जाती हैं, इस पर आप क्या कहेंगे ?
ये बिलकुल अपराध है, आप बार का लाइसेंस लीजिए या इस तरह का लाइसेंस लीजिए तब जाकर के आप चाहे तो कुछ करवाइये। मैने भी देखा है, यहां पर कुछ आउट साइड एरियाओं में जहां शराब की दुकान रहती है वहीं पास मंे ठेला वाला आ जाता है और नमकीन मसालेदार चीजे रखना शुरू कर देता है और वहीं लोग पीना शुरू कर देते है और ऐसे ही चलता फिरता बार पब्लिक खोल देती है। जिससे अपराध करने की प्रवृत्ति बढ़ती है और इस पर अंकुश लगना चाहिए। इस पर थाना स्तर पर लापरवाही पायी जाती है। जो बीट के सबइंस्पेक्टर है , कांस्टेबल है उन पर कठोर कारवाही होनी चाहिए। 

कोई विशेष कार्य जो जनहित में पुलिस ने शुरू किया ?
हम लोगांें ने ‘प्रोजेक्ट आइना’ शुरू किया है जो प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को आयोजित होता है। जिसमें हम लोगों एफआईआर, एनसीआर, प्रार्थना पत्र के जो वादी हैं जो निस्तारित हैं, जो लम्बित हैं दोनों को बुलाते है और उन मामलों के हमारे सब इंस्पेक्टर रहते है, जांचकर्ता अधिकारी भी रहते है,ं कांस्टेबल रहते हैं और इन बातों को लेकर सब आमने सामने बाते होती है। वादी को अपना पक्ष बोलने का मौका मिलता है और यह भी जानने का मौका मिलता है कि उसके मामले में क्या कारवाही हुयी है।

कोई संदेश देना चाहेंगें कानपुर वासियों के लिये ?
मैं तो सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहँूंगा कि अपराध को रोकने में जो जनता का सहयोग है वो काबिले तारिफ है और जनता ने पुलिस पर भरोसा किया है, मैं इसके लिये आभार व्यक्त करता हूँ और मैं चाहूंगा कि जनता को जहां भी लगता है कि यह गलत हो रहा है तो तुरन्त अधिकारियों के संज्ञान में लाये वो चुप न बैठे अपनी बात को किसी भी प्लेटफार्म पर लाये। चाहे डीएम साहिबा, एसएसपी या हमारे पास या कमिश्नर साहब के पास जाये। यहाँ बहुत सारे प्लेटफार्मस है अच्छे अधिकारी है कानपुर नगर का सौभाग्य है डीएम, एसएसपी, डीआईजी, कमिश्नर सभी अच्छे अधिकारियों की टीम है।

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