खाकी वर्दी में मानवता प्रेमी - आर.के.‘नायक’

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Monday 5th of September 2016 11:31:48 PM

संसाधनों और मैन पावर की कमी के कारण शहर में चारों तरफ जाम की समस्या से जूझ रही यातायात पुलिस ने पिछले दिनों एक अभिनव प्रयोग कर विकलांगों को चौराहों और भीड़ वाले क्षेत्रों में यातायात नियंत्रण के लिए लगाया। इसके सार्थक परिणाम भी मिले। अब इस प्रयोग में ट्रैफिक पुलिस ने विकलांग ट्रैफिक स्क्वायड का ट्राई साइकिल के साथ माइक देकर व्यस्त 


चौराहे पर तैनात किया है। जो माइक से यातायात नियमों का पालन करने के साथ मार्मिक अपील भी करते दिखाई देगें। महानगर में जाम की समस्या नई नहीं बल्कि वर्षो पुरानी है। इसके एक नहीं कई कारण है। जिसमें आम जनता, नगर निगम, और जल निगम समान रूप से सहभागिता है। व्यापारिक केन्द्र होने के कारण दिन के समय शहर में भीड़ का दबाव ज्यादा रहता है। शहर की यातायात पुलिस के पास इतनी बड़ी जनसंख्या और 


यातायात के दबाव को झेलने के लिए न तो संसाधन है और न ही मैनपावर है। परिणाम स्वरूप शहर वन वे, नो इण्ट्री का कोई मतलब नहीं रह गया। सी0 ओ0 ट्रैफिक राकेश नायक ने मैन पावर समस्या को दूर करने के लिए शहर के विकलांगों को प्रशिक्षण देकर ट्रैफिक जैकेट के साथ प्रमुख चौराहों और भीड़ वाले क्षेत्रों में तैनात किया। उद्देश्य यह था कि इनकी हीन भावना दूर होगी और आत्मबल जागने क साथ यातायात नियंत्रण में भी सहयोग मिलेगा।  विकलांग होने के कारण यह घण्टों चौराहे पर खड़े नहीं रह सकते इसलिये शहर प्रमुख और व्यस्त चौराहों पर इन विकलांगों को बैठने के लिए ट्राई साइकिल के साथ माइक भी दिये गये है।
समाज मे उपेक्षित समझे जाने वाले निशक्त युवाओं को यातायात संचालक के रूप में पहचान देकर पुलिस उपाधीक्षक यातायात राकेश नायक ने एक अनूठी मिसाल ही नहीं कायम की बल्कि शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को भी एक दिशा दे दी। मानवीय और जनहित दोनों ही दृष्टिकोणों से सीओ ट्रैफिक का यह प्रयास सराहनीय रहा और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी उनके कार्य की सराहना की। अपनी अनूठी कार्यशैली से शहर के ‘नायक’ बने पुलिस उपाधीक्षक यातायात राकेश नायक पिछले माह हमारे स्टूडियो के मेहमान रहे ।

प्रस्तुत है रु-ब-रु में राकेश नायक से हमारे प्रधान सम्पादक डा0 प्रदीप तिवारी से खास मुलाकात के प्रमुख अंश। 


पुलिस विभाग हो या कोई भी सरकारी नौकरी सभी जगह लोग इसे केवल नौकरी समझकर ही काम करते है बहुत कम ऐसे लोग है जो जनता से सीधे तौर पर जुड़ी सरकारी नौकरियों में सकारात्मक सोच के साथ जनहित में सोचते है। प्रांतीय पुलिस सेवा में वर्श 2007 बैच के उपाधीक्षक राकेश इसी सोच के साथ इस नौकरी में आये। अपनी पहली तैनाती में कानपुर जैसे महानगर की भारी भरकम यातायात व्यवस्था की चुनौती को राकेश ने सहज रूप में लेते हुए सुनियोजित ढंग से इस पर काम किया। उनका कहना है कि किसी भी समस्या का समाधान सभ्य समाज में दो तरह से सम्भव है । एक कानून से और दूसरा ईश्वर के भय से। आज भी 90 प्रतिशत लोग अपराध करने से इसलिए डरते है कि ऊपर वाला देख रहा है। उन्होंने कहा कि जब मैंने यहां की यातायात समस्या को समझा और पाया कि इससे निपटने के लिए हमारे पास आवश्यक मैन पावर नहीं है तब मेरा ध्यान शहर  के निशक्त लोगों का सहयोग लेने की ओर गया। काफी मंथन और प्रबुद्ध लोगां से वार्ता के बाद इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए निशक्त लोगों का चयन किया गया उन्हें ट्रेनिंग देने के साथ वर्दी उपलब्ध करायी गयी और फिर एक मार्मिक अपील के साथ इन्हें प्रमुख चौराहों पर तैनात किया गया। माइक से जब उन निशक्तों से इस काम से लगाव बना रहे इसके लिए शहर की समाज सेवी संस्थाओं के माध्यम से प्रतिमाह 2000 रूपये वेतन के साथ उनका बीमा भी करा दिया है शीघ्र ही इनके भोजन की व्यवस्था भी हो जायेगी। लोग स्वेच्छा से हमें सहयोग दे रहे है। एक सवाल के उत्तर में राकेश नायक ने कहा कि इस प्रयोग के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यशस्वी यादव ने उनका भरपूर सहयोग देकर हौसला बढ़ाया। भविश्य की योजनाओं के सम्बंध में उन्होंने बताया कि आज हमारे साथ 200 निशक्त काम कर रहे है। शहर के अन्य निशक्त लोगों के सम्बंध में शहर के गणमान्यों और उद्योगपतियों से वार्ता हुई है । पुलिस विभाग में आने से पूर्व गोरखपुर जनपद निवासी राकेश नायक की प्रारम्भिक शिक्षा गांव की प्राथमिक पाठशाला से हुई और उच्च शिक्षा गोरखपुर विद्यालय तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई। 30-35 लोगों के संयुक्त परिवार से आये राकेश नायक स्वंय तीन भाई है बड़े भाई शिक्षक है छोटा भाई डाक्टर है और पत्नी पीसीएस परीक्षा पास कर चुकी है उनका एक पुत्र है।  

Leave a Comment