आवाम का विकास ही प्रसाषन की सफलता है।

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Wednesday 2nd of September 2015 05:34:55 PM


जौनपुर के एक छोटे से गांव बबनियांव से अपनी प्रारम्भिक शिक्षा और इलाहबाद यूनीवर्सिटि से स्नातक की परीक्षा उत्र्तीण करने के बाद, प्रशासनिक सेवा में रुझान के चलते इन्होने वादियों के शहर नैनीताल में ट्रेनिगं ली और अपनी पहली ज्वाइनिंग उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले में की । लगभग एक र्वष कानपुर शहर में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनाती के बाद र्माच 2013 में ए.डी.एम. सिटी कानपुर नगर की कमान संभाली और पुलिस एवं प्रशासन के बीच बेहतरीन सामंजस्य और टीम र्वक पर विश्वास रखने वाले बेहद ईमानदार और र्कतव्यनिष्ठ अधिकारी अविनाश सिंह एक खास मुलाकात में रु-ब-रु हुए हमारे एडिटर इन चीफ प्रदीप तिवारी से । प्रस्तुत है उनसे बात चीत के प्रमुख अंश -
आप कहाँ के रहने वाले हैं और आपकी प्रारम्भिक शिक्षा कहाँ से हुई ?
मेरा पैतृक और स्थायी निवास जौनपुर जिले का बबनियांव गांव है । मेरे पिता जी 1970 बैच के पी.सी.एस के एकाउंट और फाइनेंस विभाग मंे सेवारत रहे। ज्यादातर  पिता जी की तैनाती इलाहबाद में रही उसी कारण हमारा अस्थायी निवास भी वहीं के सरकारी आवास में रहा और हमारी स्नातक तक की पढ़ाई भी इलाहबाद यूनिवर्सिटी में ही हुई।

आपको प्रशासनिक सेवा में आने की प्रेरणा कहां से मिली ?
मेरे दोनों बहनोई हाई कोर्ट ज्यूडीशियल सर्विस मंे है और छोटा भाई भी आईआईटी से पढ़ाई करने के बाद आज यू.एस.ए में सैटल हो गया है, आप कह सकते है कि मेरी पृष्ठभूमि प्रशासनिक रही है।

अभी तक आपने किन जिलों में अपनी सेवायें प्रदान की है ?
नैनीताल में ट्रेनिंग के बाद पहला जिला जहां मेरी तैनाती हुई वह आजमगढ़ था। उसके बाद देहरादून, मेरठ, बिजनौर, मथुरा, लखीमपुर खीरी और आज आपके कानपुर शहर में सेवायें दे रहा हूँ। हां बीच में जरूर 2 माह के लिए निर्वाचन आयोग ने मुझे चुनाव कराने के लिए सुल्तानपुर भेजा था। 

ए.डी.एम के पद पर आप कब से कानपुर में सेवायें दे रहे है और कैसा अनुभव रहा यहँा काम करने का ?
मेरी कानपुर में ए.डी.एम के पद पर ज्वाइनिंग 9 मार्च 2013 की है। किन्तु इससे पहले मैं करीब एक साल यहँा पर सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर भी रह चुका हूँ। जिसके कारण कोई समस्या नहीं आई यहँा पर काम करने में उस दौरान शहर में सभी  वर्ग के लोगों से जान-पहचान हो गई। यहँा पर सभी त्यौहार बहुत बड़े पैमाने में मनाये जाते हैं। हम लोगों ने हर वर्ग के त्यौहारों में मुस्तैदी से काम किया। चूंकि सिटी मजिस्ट्रेट रहते हुए कई त्यौहारों को हम सफलता पूर्वक निपटा चुके थे, तो इस पद पर इसका बहुत फायदा मिला। हाँ, जब मैं कानपुर ज्वाइन करने आ रहा था तो मुझे लोगों ने बताया था कि शहर हिन्ूद-मुस्लिम दंगों के कारण काफी चर्चित है। दंगों के दौरान यहां पर अपर जिला अधिकारी स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी मार दिया गया था। जिसको लेकर मन में कुछ आशकांए तो थी, पर अपने कार्यकाल में मैं देख रहा हूँ कि कानपुर एक जिंदादिल शहर है। मेरा मानना है कि यहां पर प्रशासन और आम जनता के बीच अगर संवादनहीनता न पैदा होने दे तो यहँा कोई दिक्कत नहीं होती। यहँा पर अब चाहे किसी भी पार्टी के लोग हो या किसी भी धर्म के सभी समझदार हो चुके है वह स्वंय आपस में संवादहीनता नहीं पनपने देते। पूरे वर्ष में अगर आप देंखे तो कानपुर में त्यौहारों को जिस तरह मनाया जाता है चाहे वो होली हो या मोहर्रम का जुलूस सभी में प्रशासन को बहुत सर्तकता के साथ काम करना पड़ता है। परन्तु यहां पर प्रशासन और आवाम के बीच जरा भी कम्यूनिकेशन गैप नहीं है। आवाम को प्रशासन पर पूरा विश्वास है, जो आपको स्वंय पिछले 2 सालों में शहर में देखने को मिला होगा। 

यहँा पर पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल पर आपकी क्या राय है ?
दोनों के बीच बेहतरीन साम्ंाजस्य है , ये दोनांे गाड़ी के दो पहियों के समान हैं अगर एक का सन्तुलन बिगड़ा तो दूसरा दौड़ नहीं पायेगा। आप इस बात से अंदाजा लगा सकते है कि यहँा पर हाल ही में कुछ शरारती तत्वों ने मौहाल को खराब करने की कोशिश की थी, किन्तु ये पुलिस और प्रशासन का आपसी सामंजस्य ही है कि माहौल नहीं बिगड़ने दिया। आप देख सकते हे कि पिछले वर्ष कानपुर में नरेन्द्र मोदी जी की पहली चुनावी सभा का आयोजन सफलता पूर्वक हुआ, पिछले 5 सालों से किसी भी अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच के लिए कानपुर ब्लैक लिस्टेड था उसका भी जवाब हमने भारत-श्रीलंकावन-डे मैच का सफल आयोजन कर दिखाया। जिसकी प्रशंसा बीसीसीआई ने भी की तो यह सब पुलिस और प्रशासन के को-आॅरडिनेशन के बिना संभव नहीं था। निश्चित तौर पर आप कह सकते हैं कि यह हमारे डी.आई.जी. एसएसपी साहब से लेकर सीओ तक की एक टीम वर्क का ही नतीजा है जो हम ऐसे सफल कार्यक्रम कर पाये। 

प्रशासनिक सेवा में राजनीतिक दखल को किस स्तर पर मानते हे ?
कानपुर में मैं राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े लोगों की तारीफ करना चाहूंगा कि मुझे अपनी अभी तक की नौकरी के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आयी। क्योंकि जब भी कोई राजनीतिक दल या उसका कोई सदस्य हमारे पास आया, तो वह जनता के हित की बात करने आया और हम जनता के लिए ही यहां बैठे हैं ।  मैं कह सकता हॅूँ हमारा राजनीतिक दलों से तालमेल बहुत अच्छा है और उनका हमारी कार्यप्रणाली में दखल को आप जीरो प्रतिशत कह सकते है। चाहे वो राजनीतिक दल हो या धार्मिक सभी ने पिछले कुछ वर्षो में जो सद्भावना व एकता का संदेश दिया है वो उत्तर प्रदेश ही नहीं समूचे भारत में काबिले तारीफ है। हाल ही में यूपी में भी कुछ अप्रिय घटना हुई पर यहां के लोगों में सामाजिक समरसता, सांप्रदायिक सौहार्द का जो माहौल बना था, जिससे हम लोगांे को कभी चिंता नहीं हुई। 

कार्यकाल के दौरान कोई यादगर पल ?
ऐसे तो कई पल आये मेरे कार्य काल के दौरान लेकिन यहां पर मैं आपको कानपुर के लुधौरा की एक घटना के बारे में बताना चाहूंगा। वहाँ किसी बात को लेकर हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग आमने सामने थे, पथराव हो रहा था बिजली भी नहीं आ रही थी। उस वक्त हमने परिचय के कुछ लोगों को जो दोनों ही वर्ग के थे, मौके पर पहुंचने को कहा और हम लोग भी अपने आला अधिकारियों के साथ वहां पहुंचे आपको यकीन नहीं होगा, हमारे हिन्दू-मुस्लिम साथी दीवार बनकर वहां खड़े हो गये और न ही केवल टकराव को रोका, बल्कि मुश्किल से 30 मिनट के अन्दर स्थित को भी काबू मंे ला दिया जिसेक बाद हम लोग रात 2ः30 से 3ः00 बजे तक वहाँ रहे और पूरी तरह उनका विश्वास जीतने के बाद 3 से 4 दिन मंे माहौल एकदम सामान्य हो गया। 

आपके परिवार में कौन-कौन है ?
परिवार में मेरी वाइफ और एक बेटा है जो जयपुरिया में पढ़ता है। 

    आपकी पत्रिका के माध्यम से कानपुर वासियों को यह संदेश देना चाहूंगा की बड़ी से बड़ी लड़ाई का हल टेबिल पर ही हुआ है तो कभी भी लड़ाई-झगड़ांे को बढ़ावा न देकर पिछले वर्षांे की तरह शांति के संदेश दे जिसमें शहर की पुलिस व प्रशासन दोनों ही शहरवासियों की हर समस का निस्तारण करने के लिए सदैपव तत्पर हैं।

 

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