हैलट में ब्लड कैंसर के शिकार बच्चों को मिलेगा मुफ्त इलाज

Posted by: Tauseef Tuesday 11th of November 2014 06:14:38 PM

कानपुर । हैलट के बालरोग विभाग में आने वाले ब्लड कैंसर से ग्रस्त बच्चों को अब इलाज के लिए पीजीआई लखनऊ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बहुत जल्द उन्हें यहां मुफ्त इलाज मिलने लगेगा। बालरोग विभाग ने इस बाबत अस्पताल प्रशासन को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें असाध्य रोगों के मद में मिले 50 लाख रुपये बजट का उपयोग ऐसे बच्चों के इलाज मे करने की बात रखी गयी है। हैलट के बालरोग विभाग की ओपीडी में हर साल एक्यूट लिम्फो ब्लास्टिक ल्यूकीमिया (ब्लड कैंसर) से ग्रस्त 20 से 25 नये केस आ रहे हैं। ज्यादातर बच्चे एक से पांच साल तक की उम्र के होते हैं। बालरोग व ब्लड कैंसर विशेषज्ञ डा. एके आर्या के मुताबिक बच्चों में इस तरह का ब्लड कैंसर कामन है। ऐसे बच्चों को दो से ढाई साल तक कीमोथेरेपी देनी पड़ती है, जिसमें दवाएं चलती हैं। इलाज के पूरे कोर्स में करीब तीन लाख रुपये खर्च आता है। यहां आने वाले ज्यादातर पीड़ित बच्चे निर्धन परिवार के होते हैं, जिनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं होते। लिहाजा उन्हें पीजीआई लखनऊ रेफर करना पड़ता है। राजकीय जेके कैंसर संस्थान रावतपुर में ब्लड कैंसर के व्यस्क मरीजों को ही इलाज मिलता है। बच्चों को यहां रेफर किया जाता है। डा. आर्या ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए अस्पताल प्रशासन को ब्लड कैंसर से पीड़ित बच्चों के मुफ्त इलाज के लिए प्रस्ताव दिया है। जिसमें कहा गया है कि शासन से असाध्य रोगों के मुफ्त इलाज के लिए मिलने वाली कुल रकम का एक भाग इस तरह के मरीजों के इलाज में खर्च करने की व्यवस्था की जाए। हैलट को असाध्य रोगियों के मुफ्त इलाज के लिए सालाना एक करोड़ रुपये बजट दिये जाने का प्रावधान है। इस साल पहली किश्त के रुप में अस्पताल को पचास लाख रुपये जारी हो चुके हैं। जिसमें यहां आने वाले गुर्दा व लिवर के मरीजों को ही मुफ्त इलाज नसीब हो रहा। बीते साल पहली किश्त के रुप में हैलट को 50 लाख रुपये मिले थे, मगर खर्च न कर पाने पर 46 लाख रुपये वापस हो गये थे। डा. आर्या के अनुसार बच्चों में दो तरह के ब्लड कैंसर एक्यूट लिम्फो ब्लास्टिक ल्यूकीमिया (एएलएल) व एक्यूट मायलायड ल्यूकीमिया (एएमएल) पाये जाते हैं। खून की कमी, शरीर में लाल चकत्ते या ब्लीडिंग होना, लिम्फनोड्स बढ़ना, हडिडयों में दर्द, सिर दर्द, उल्टी आना इसके लक्षण हैं। कीमोथेरेपी से एएलएल नामक ब्लड कैंसर के ज्यादातर रोगी पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, जबकि एएमएल नामक ब्लड कैंसर के केस में बोनमेरो ट्रांसप्लांट एक मात्र विकल्प है। यह काफी महंगा और देश में कुछ स्थानों पर उपलब्ध है। ब्लड कैंसर से पीड़ित बच्चों के लिए अलग वार्ड जरुरी है। बालरोग अस्पताल में इसकी सुविधा नही है। प्रस्ताव में अलग वार्ड की डिमांड भी रखी गयी है। डा. आर्या ने बताया, ऐसे बच्चों में कीमोथेरेपी के दौरान आरबीसी, टीएलसी, प्लेटलेट्स की मात्रा घटने लगती है। इस पर उन्हें ब्लड चढ़ाना पड़ता है। इस दौरान प्रतिरोधक क्षमता घटने पर निमोनिया व अन्य संक्रमण का खतरा रहता है। 

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