यूपी चुनाव से पहले अखिलेश सरकार ने चला ये बड़ा दांव, मायावती ने बताया धोखा

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Saturday 24th of December 2016 04:18:28 PM

 उत्तर प्रदेश मंत्रिमण्डल ने 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल करने के प्रस्ताव को आज फिर पारित किया. इसे जल्द ही केन्द्र के पास भेजा जाएगा. राज्य सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में 17 अतिपिछड़ी जातियों कहार, कश्यप, केवट, निषाद, बिंद, भर, प्रजापति, राजभर, बाथम, गौर, तुरा, मांझी, मल्लाह, कुम्हार, धीमर, गोडिया और मछुआ को अनुसूचित जाति में शामिल करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गयी है और इसे जल्द ही केन्द्र की मंजूरी के लिये भेजा जाएगा.

पिछड़ी जातियों को लुभाने की कोशिश

राज्य विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के बीच सरकार के इस कदम को इन पिछड़ी जातियों को लुभाने की कोशिश माना जा रहा है.

हालांकि यह पहली बार नहीं है कि जब इस प्रस्ताव को कैबिनेट से पारित करके केन्द्र के पास भेजा गया हो. साल 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भी यही प्रस्ताव पारित कराकर केन्द्र के पास भेजा था.

इसी तरह मौजूदा अखिलेश यादव सरकार ने भी 22 मार्च 2013 को विधानसभा में यह प्रस्ताव पारित कराकर केन्द्र को प्रेषित किया था.

प्रस्ताव में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा किये गये विस्तृत अध्ययन के अनुसार इन 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाना चाहिये. संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक किसी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिये संसद में प्रस्ताव पारित कराना अनिवार्य है. राज्य सरकार इस सिलसिले में सिर्फ सिफारिश ही कर सकती है.

जनता को गुमराह करने का खोखला और हवाई चुनावी हथकण्डा

इस बीच, बीएसपी प्रमुख मायावती ने अखिलेश मंत्रिमण्डल द्वारा 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किये जाने को प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इन जातियों को गुमराह करने का खोखला और हवाई चुनावी हथकण्डा करार दिया है.

उन्होंने कहा कि एसपी सरकार के इस फैसले से इन वर्गो का फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही होगा क्योंकि तब वे अपने अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत मिलने वाली आरक्षण की सुविधा से भी वांचित हो जायेंगे. अक्तूबर 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इन 17 जातियों को अनुसूचित जाति की सुविधाएं देने का शासनादेश जारी किया था तब वे जातियाँ ना तो अनुसूचित जातियों में शामिल हो पायीं थी और ना ही उनका नाम अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में रह पाया था.

केन्द्र सरकार के पास भेजा गया था प्रस्ताव

मायावती ने दावा किया कि वर्ष 2007 में बीएसपी की सरकार बनने पर इन 17 जातियों को उनकी आरक्षण की सुविधा को बहाल करने के साथ-साथ कोटा बढ़ाने के आग्रह के साथ उन्हें अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजा गया था, जो कि अब भी लम्बित है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में प्रदेश की एसपी सरकार ने अपने शासनकाल के दौरान एक बार भी केन्द्र सरकार पर दबाव नहीं बनाया और उसे नजरअन्दाज करती रही लेकिन अब चुनाव के समय समाज को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है.

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