कानपुर IIT में एडमिशन शुरू, दिखा ग्रामीण-मॉर्डन लुक का अद्भुत संगम

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Saturday 2nd of July 2016 06:05:18 PM

कानपुर- देश के सबसे बड़े तकनीकी संस्थान आईआईटी में दाखिले का दौर शुरू हो गया है। कानपुर आईआईटी में भी दाखिले को लेकर शुक्रवार को काफी गहमागहमी रही। अपने बच्चे के सफलता की खुशी अभिभावकों के चहरे पर साफ झलक रही थी। दाखिले के पहले दिन आईआईटी कानपुर में सब रंग दिखे, ग्रामीण परिवेश और मॉर्डन लुक का अद्भुत संगम देखने को मिला। सभी छात्रों के डॉक्यूूमेंट वेरिफिकेशन किया गया। साथ ही एडमिशन फीस भी जमा करवा ली गई।
मांं का सपना था कि मैं आई आई टी में पढूंं
- फतेहपुर के खागा कसबे से आई संगीता सिंह सेंगर अपनी बेटी के रंजना सिंह सेंगर के इस सफलता से फुले नहीं समा रही थी. सर पर पल्लू लिए संगीता सिंह सेंगर भले ही ग्रामीण परिवेश से हो. मगर इनका यही सपना था कि उनकी बेटी एक दिन देश के सबसे बड़े संस्थान में पढ़े। 
- संगीता सिंह सेंगर ने बताया कि वो भले ही ज्यादा नहीं पढ़ पायी मगर जब उनको शादी के बाद पहली बेटी हुई तभी उन्होंने इसको खूब पढ़ाने का सपना अपने मन में संजो लिया था. इनके मुताबिक़ इनकी बेटी रंजना शुरू से ही पढ़ने में बहुत होशियार थी, मगर घर की माली हालत ठीक ना होने की वजह से इन्होने रंजना को अंग्रेजी माध्यम के बजाय हिंदी माध्यम स्कूल में दाखिला दिलवाया था।
- रंजना ने भी अपनी माँ का सपना पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और पहले ही राउंड में आई आई टी के प्रवेश परीक्षा को पास कर पुरे खानदान में अपने माँ पापा का सर गर्व से उंचा कर दिया. 
- रंजना सिंह के पापा जितेन्द्र सिंह सेंगर खागा में एक छोटी सी दूकान चलाते है, जिसके इनकम से पूरा घर का खर्च चलता है, मगर उन्होंने अपने बेटी और बेटो के पढ़ाई में कोई अवरोध नहीं आने दिया. 
- रंजना सिंह सेंगर को आई आई टी बीएचयू में कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग मिला है, रंजना के साथ आये उसके ममेरे भाई सचिन सिंह ने बताया कि रंजना को पढ़ाई के अलावा किसी और चीज में मन नहीं लगता था. घर के काम में माँ का हाथ बटाने के बाद उसे जो समय मिलता वो पढ़ने में ही गुजारती थी. 
- रंजना से छोटे दो भाई और है जो अभी गाँव में ही पढ़ाई कर रहे है, रंजना ने यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमिडीएट सरस्वती चन्द्र विद्या मंदिर से किया है. हाईस्कूल में 92.5 % और इंटर 91.5 % अंक मिले।
भाई ने जिद्द पकड़ ली थी कि आई आई टी में जाऊं
- कानपुर देहात के सिकंदरा थाना अंतर्गत निगौरा गाँव के रहने वाले शैलेश कुमार अपने इस सफलता का पूरा श्रेय अपने बड़े भाई को देते है. इनका दाखिला करवाने के लिए इनके बड़े भाई देवेन्द्र कुमार खुद साथ में आये थे।
- देवेन्द्र ने बताया कि जब शैलेश का दाखिला गाँव के नन्द लाल स्कूल में करवाया गया तो, ये अपने क्लास में हमेशा एक या दुसरे पोजीशन पर रहता था. इसकी पढ़ाई में लगन देख इन्होने शैलेश का दाखिला कशा 6 में वाही के एक अंग्रेजी माध्यम के ज्ञान स्थलीय अंग्रेजी मीडियम स्कूल में करवा दिया। 
- इनके मुताबिक़ शैलेश को अंग्रेजी पिकअप करने में महज तीन से चार महीने का समय लगा, इस स्कूल में पढ़ते हुए शैलेश ने हाईस्कूल में 10 सी जी पी ए हासिल कर पुरे गाँव को अचंभित कर दिया था. 
- इसके बाद शैलेश ने सिकंदरा कसबे के देवी दयाल स्मारक इंटर कॉलेज से 12 वीं क्लास में 89% अंक हासिल किया. शैलेश ने बताया कि उसके बड़े भाई खुद एक प्रायमरी स्कूल में टीचर है, और जब हाई स्कूल में दस सीजीपीए आया उसी समय इनके भाई ने इनको साफ़ साफ़ कह दिया था कि तुम्हे आई आई टी में ही पढ़ना है। 
- इनके मुताबिक़ इनके भैया ने इनको कानपुर में आई आई टी जेईई के लिए कोचिंग भी कराया, और आज दाखिला भी शैलेश के भाई देवेन्द्र अपने रुए से करवा रहे है। 
- देवेन्द्र ने बाताया कि वो दो भाई है जिसमे शैलेश छोटा है, गाँव में एक बीघे का खेत है उसमे जो भी होता है, उससे घर का खर्च चलता है, इनके मुताबिक़ इनकी शादी भी हो गयी है, मगर इससे इन्होने अपने भाई के पढ़ाई पर कोई आंच नहीं आये दिया।
- देवेन्द्र के मुताबिक़ एक ग्रामीण परिवेश में पढ़ते हुए शैलेश ने उनको और पुरे परिवार को बेहद ख़ुशी दी है, अपने छोटे भाई के पढ़ाई का खर्च खुद देवेन्द्र सिंह उठाएंगे। 
- शैलेश को आई आई टी गुवाहाटी में मैकेनिकल विभाग मिला है, जिसके लिए शुक्रवार को ये अपने भैया के साथ अपने डाक्यूमेंट जमा करने के साथ दाखिला लेने आया था।
प्रोफेशर बनने का ख्वाब है इस ग्रामीण छोरे को
- मैंने तो कल्पना भी नहीं किया था कि मेरा बेटा आई आई टी में पढ़ने जाएगा, इटावा के बुलाकीपुर ब्लाक के लुहन्ना गाँव के रहने वाले धीर सिंह पेशे से किसान है, इनके मुताबिक़ इनके पूरे खानदान में इतने उचे शिक्षण संस्थान में आजतक किसी ने पढ़ाई नहीं की है। 
- अपने बेटे के सफलता पर खुश धीर सिंह के मुताबिक़ इनके चार बच्चे है जिसमे इनका बड़ा बेटा साबिर सिंह इनदिनों औरैया से बीएससी कर रहा है, जबकि दुसरे नंबर पर सुकेंद्र है, जिसका आई आई टी में शुक्रवार को दाखिला हो गया, तीसरा बेटा महेंद्र सिंह दसवी में पढ़ रहा है तो चौथा बेटा अभी सातवी में पढ़ रहा है। 
- सुकेंद्र ने प्राम्भिक शिक्षा से बारहवीं तक उस गाँव के संत विवेका नन्द पब्लिक स्कूल तक पढ़ाई की. सुकेंद्र ने बारहवीं में 86% और हाई स्कूल में 8.4 सीजीपीए हैसिल किया है। 
- सुकेंद्र के मुताबिक़ जब इन्होने अपने पापा को आई आई टी के प्रवेश परीक्षा देने की बात कही तो पहले इनके पिता जी ने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए मना कर दिया था, मगर मेरे चाचा के कहने पर पापा ने मुझे इसकी तैयारी के लिए कोटा में कोचिंग करवाया, इसके मुताबिक़ कोचिंग करने के लिए इनके पापा ने कर्ज भी लिया था। 
- आई आई टी प्रवेश लेने आये सुकेंद्र का सपना कंप्यूटर साइंस से पढ़ने का था मगर इनकी एक आँख बचपन से ही खराब होने और दूसरी आँख में रोशनी कम होने की वजह से इनको कंप्यूटर साइंस की जगह मुंबई आई आई टी के इंजीनियरिंग फिजिक्स में दाखिला मिला है। 
- सुकेंद्र आई आई टी में बीटेक करने के बाद आगे पीएचडी कर प्रोफेशर बनाना चाहते है, सुकेंद्र इंडिया के बाहर जाने के बजाय भारत में ही रहना चाहते है साथ ही वो यूपी में अपना जॉब करना चाहते है।

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