जी भरकर खाया और गाया भी जी भरकर

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Tuesday 13th of October 2015 05:28:22 PM

 

आज भी नुसरत फ़तेह अली ख़ान की आवाज़ कानों में पड़ती हैं, तो बहुत से लोग मंत्रमुग्ध होकर उनकी गायकी में खो जाते हैं.
उस आवाज़ के अनूठेपन और रूहानियत को चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता है. उनकी आवाज़़-उनका अंदाज़, उनका हाथों को हिलाना, चेहरे पर संजीदगी का भाव, संगीत का उम्दा प्रयोग. शब्दों की शानदार रवानगी... उनकी खनक... सब कुछ हमें किसी दूसरी दुनिया में ले जाने पर मजबूर करता है. पाकिस्तान बनने के लगभग साल भर बाद नुसरत का जन्म पंजाब के लायलपुर (मौजूदा फैसलाबाद) में हुआ. वो 13 अक्टूबर 1948 को क़व्वालों के घराने में जन्मे. नुसरत फ़तेह अली ख़ान की चार बहने थीं और दो छोटे भाई थे. पिता उस्ताद फ़तेह अली ख़ान साहब ख़ुद भी मशहूर क़व्वाल थे. उस्ताद पिता ने नुसरत को पहले तबला सिखाना शुरू किया लेकिन बाद में नुसरत ने गायन को ही अपना मुक़ाम बना लिया. हालांकि नुसरत परंपरागत तरीक़े से क़व्वाली तो लंबे अरसे से गा रहे थे, मगर उनके लिए तो अभी दुनिया में शोहरत बटोरने की शुरुआत होनी बाक़ी थी. वो साल था 1985. लंदन में वर्ल्ड ऑफ म्यूज़िक आर्ट एंड डांस फ़ेस्टिवल का आयोजन हुआ. इसमें उन्होंने पीटर गैब्रिएल के साथ अपना म्यूज़िक दुनिया के सामने रखा. इसके बाद तो चमत्कार हो गया, जिसने भी इसे सुना वो इसका दीवाना बन गया. ऐसा निराला अंदाज़, दुनिया भर में जो लोग पंजाबी-उर्दू और क़व्वाली नहीं भी समझ पाते थे, वो भी उनकी आवाज़़ और अंदाज़ के दीवाने हो गए.

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