सहारा ने सेबी के रिफंड खाते में 1.3 करोड़ डॉलर लाने के दावे का समर्थन किया

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Monday 13th of April 2015 03:51:10 PM

सेबी के साथ लंबे समय से कानूनी विवाद के उलझे सहारा ने अमेरिकी अदालत के सामने नियामक के समक्ष संकट ग्रस्त समूह की कापरेरेट जेट बेचने से मिली करीब 1.3 करोड़ डालर की राशि वापस लाने के दावे का समर्थन किया है।समूह ने इस मामले में सेबी के सक्रिय योगदान की भी प्रशंसा की जो भारत में एक मुकदमे के बाद सहारा समूह के स्वामित्व वाले कापरेरेट जेट की बिक्री के अदालती अदेश से जुड़ा है और एस्क्रो खाते में रखी राशि के वितरण पर विचार के लिए रिसीवर (मुकदमे से जुड़ा संपत्ति का सरकारी प्रबंधक) नियुक्त किया गया था।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कोष के दावे के साथ पिछले महीने इंडियानापोलिस अदालत की अदालत का दरवाजा खटखटाया था जिसे सेबी-सहारा रिफंड खाते में हस्तांतरित करने की जरूरत है ताकि भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया जा सके। अमेरिकी अदालत ने यह मांग खारिज कर दी क्योंकि यह दावा तय समयसीमा के बाहर किया गया था और यह इसके आदेश के अनुरूप नहीं था। बहरहाल, अदालत ने रिसीवर को दावे की वैधता की जांच करने और इसके आधार पर फैसला करने के लिए कहा था।

इस घटनाक्रम पर सहारा समूह के प्रवक्ता ने आज कहा कि सहारा समूह की एक कंपनी, हास्पिटैलिटी बिजनस लिमिटेड ने एक नया एयरबस ए319 विमान खरीदा था। प्रवक्ता ने कहा ‘यह विमान ब्रिटेन के परिचालक को दीर्घकालिक पट्टे पर निजी चार्टर के लिए लग्जरी कार्यकारी जेट के तौर पर चलाने के लिए दिया जाना था। हास्पिटैलिटी ने इस विमान को आंतरिक सज्जा और केबिन के काम के लिए इंडियानापोलिस की ‘कॉम्लक्स’ के पास भेजा।’

प्रवक्ता ने कहा ‘हास्पिटैलिटी, कॉम्लक्स को अनुबंध राशि का भुगतान नहीं कर सकी क्योंकि सहारा समूह विदेशी मुद्रा में सौदे नहीं कर सकता था। कॉम्लक्स ने इंडियानापोलिस में हास्पिटैलिटी के खिलाफ एक मामला दायर किया और जिसमें उसके पक्ष में फैसला दिया गया।’ एस्क्रो खाते से धन देने के संबंध में अदालत में किए गए दावे के संबंध में सहारा ने कहा ‘रिसीवर ने इंडियानापोलिस अदालत द्वारा जारी तृतीय पक्ष का दावा आमंत्रित किया।’ विमानों की बिक्री के बाद ब्रिटेन के चार्टर परिचालक से दावा मिलने के अलावा सेबी ने भी रिसीवर को ईमेल कर कॉम्लक्स को अदा किए जाने के बाद बची राशि में दावा ठोका।

उन्होंने बताया ‘अदालत और रिसीवर ने चिंता व्यक्त की थी कि सेबी की ईमेल से भेजी गई आपत्ति - दावा उचित स्वरूप में नहीं है। यह अनिवार्य आपसी कानूनी सहायता संधि प्रोटोकॉल के जरिए नहीं भेजा गया है और यह प्रमाण के साथ सिद्ध नहीं किया गया है।’ प्रवक्ता ने कहा कि सहारा और हास्पिटैलिटी बिजनस लिमिटेड ने हालांकि अदालत में स्पष्ट किया था कि शेष राशि सेबी के खाते में वापस की जानी चाहिए जिसमें सहारा भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए धन इकट्ठा कर रही है।

प्रवक्ता ने कहा ‘सहारा ने अदालत को बताया था कि वह नहीं चाहता कि रिसीवर अतिरिक्त राशि समूह को दे बल्कि सेबी के दावे को पात्रता के आधार पर खारिज करने के विचार के बावजूद अदालत भारतीय नियामक के नामित खाते में उक्त राशि दे दे।’ उन्होंने कहा ‘हालांकि इंडियानापोलिस अदालत ने सेबी का दावा स्वीकार नहीं किया, सहारा और हास्पिटैलिटी के विशेष आग्रह पर रिसीवर ने शेष पूरी राशि (करीब 1.3 करोड़ डालर) उक्त खाते में सीधे डालने का निर्देश दिया और इसका ब्योरा रिसीवर ने सेबी को भेज दिया है।’ उन्होंने कहा ‘सहारा और सेबी ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि पूरी राशि बिना देरी के भारत भेजी जाए।’ उन्होंने कहा ‘सहारा ने सेबी की सक्रिय भागीदारी की सराहना की जिससे बगैर प्रक्रियात्मक देरी के धन भारत भेजने का फैसला हुआ।’

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