सर्जिकल स्ट्राइक से लुढ़का सेंसेक्स-निफ्टी

Posted by: राधिका प्रकाश Friday 30th of September 2016 06:25:36 PM

 शेयर बाजार में थोड़ा खौफ है. पाक अधिकृत इलाके में भारत के सर्जिकल स्ट्राइक और पंजाब के सीमावर्ती गांवों को खाली कराए जाने की खबरों ने बिकवालों को निवाला दे दिया है. नतीजा, गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 455 अंक और 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 150 अंकों से भी ज्यादा लुढ़क गया.

वैसे गुरुवार को कारोबार की शुरुआत बेहतर हुई थी. देसी-विदेशी माहौल से संकेत अच्छे थे. लेकिन दोपहर के 12 बजते-बजते माहौल बदल गया. जैसे ही सर्जिकल स्ट्राइक का आधिकारिक तौर पर ऐलान हुआ, बाजार में घबराहट भरी बिकवाली शुरु हो गयी. वैसे कारोबारियों का ये भी कहना है कि बाजार में पहले से ही भाव ऊंचे स्तर पर चल रहे थे और जैसे ही मुनाफावसूली का मौका मिला, बिकवालों की बन गयी. खैर वजह जो भी हो, लेकिन कुल मिलाकर नतीजा ये रहा कि बीएसई सेंसेक्स 465 प्वाइंट की गिरावट के बाद 27828 पर बंद हुआ जबकि एनएसई निफ्टी 154 प्वाइंट लुढ़का और अंत में 8591 पर जा पहुंचा.

वैसे रुपये की बात करें तो उसमें थोड़ी मजबूती दिखी. एक डॉलर की कीमत 66 रुपये 82 पैसे से 88 पैसे के बीच झूलती रही. जानकारों की मानें तो रुपये को लेकर चिंता करने की कोई बात नहीं, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार 370 अरब डॉलर के करीब की मजबूत स्थिति में है. ऐसे में अगर शेयर बाजार में बहुत ज्यादा घबराहट भरी बिकवाली होती भी है तो रुपये पर कोई खास असर नही पड़ेगा.

फिलहाल, अब सवाल ये है कि शेयर बाजार की आगे की चाल कैसे रहेगी? सच पूछिए तो आगे भी कुछ बिकवाली देखने को मिल सकती है, लेकिन ऐसी नहीं कि पूरा शेयर बाजार ही औंधे मुंह गिर पड़ेगा. क्योंकि बुनियादी तौर पर भारत बेहद मजबूत माना जाता है. ऐसे ही कुछ बुनियादी बातों पर एक नजर:

आर्थिक विकास दर 8 फीसदी के करीब पहुंचने का अनुमान है. ये दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले सबसे तेज है.
प्रतिस्पर्धा की नवीनतम रैकिंग में भारत 39 वें स्थान पर है. ब्रिक्स (BRICS) देशों में भारत से ऊपर केवल चीन है.
उम्मीद की जा रही है कि कारोबारी सुगमता के लिहाज यानी Ease of Doing Business के मामले में विश्व बैंक की रैकिंग में सुधार होगा. मौजूदा रैंकिंग 130 वीं है.
मोदी सरकार पूरे देश को एक बाजार बनाने वाली कर व्यवस्था जीएसटी अगले साल पहली अप्रैल से लागू करने के लिए जोर-शोर से जुटी है. इससे कारोबार करना तो आसान होगा ही, जीडीपी में 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है.

इसमे कोई शक नहीं कि बाजार में बुनियादी बातों से कहीं ज्यादा महत्व भावनाओं को दिया जाता है, लेकिन ये भी सच है कि भावनाएं या तात्कालिक घटनाएं थोड़े समय के लिए ही असर डालती है, लंबे समय में बाजार की चाल काफी हद तक बुनियादी बातों पर ही निर्भर करती है.

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