विदेश व्यापार नीति: 5 साल में निर्यात दोगुना कर 900 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Thursday 2nd of April 2015 02:17:00 PM

केन्द्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने आज नई विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) की घोषणा करते हुये वर्ष 2019-2020 तक वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात दोगुना कर 900 अरब डालर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है और इसके लिये कई तरह के प्रोत्साहनों और नई संस्थागत प्रणालियों की घोषणा की है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमन ने 2015 से 2020 तक की पंचवर्षीय विदेश व्यापार नीति जारी करते हुये कहा कि विनिर्माण, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने तथा कारोबार करना आसान बनाने के लिये इस नीति को सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे महत्वपूर्ण अभियानों से जोड़ा जा रहा है।

वर्ष 2020 तक विश्व व्यापार में भारत की व्यापार भागीदारी दो प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिये सरकार शुल्कों को तर्कसंगत बनाने पर भी विचार कर रही है। राजग सरकार की पहली विदेश व्यापार नीति पेश करते हुये निर्मला सीतारमन ने कहा कि निर्यात प्रोत्साहन के लिये नीति में कई तरह की योजनाओं को शामिल किया जायेगा। इसके लिये भारत से वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) और भारत से सेवा निर्यात योजना (एसईआईएस) की शुरुआत की जायेगी।

सीतारमन ने कहा कि निर्यात प्रोत्साहन के लिये पूंजीगत सामानों के आयात की रियायती ईपीसीजी योजना के तहत निर्यात दायित्वों में भी राहत दी जायेगी। इसके साथ ही सभी तरह के निर्यात लाभों को सेज स्थित इकाइयों को भी उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने कहा, एफटीपी आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक व्यापार भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक कार्ययोजना है जिससे वर्ष 2020 तक भारत विश्व व्यापार में एक महत्वपूर्ण भागीदार होगा।

वाणिज्य सचिव राजीव खेर ने इस मौके पर कहा कि सरकार देश से वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 2013-14 के 465.9 अरब डालर से बढ़ाकर 2019-20 तक 900 अरब डालर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। निर्यातकों की 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी योजना की बहुप्रतीक्षित मांग के बारे में उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस योजना के क्रियान्वयन के मुद्दे पर मंत्रिमंडल नोट जल्द तैयार करेगा। वर्ष 2015-16 के बजट में निर्यात के लिये ब्याज सब्सिडी के तौर पर 1,625 करोड़ रपये आवंटित किये गये हैं।

विश्व व्यापार में भारत की भागीदारी बढ़ाने और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तहत दायित्वों को निभाने के लिये विदेश व्यापार नीति में कई संस्थानों की स्थापना करने का भी प्रस्ताव किया गया है। व्यापार परिषद और राष्ट्रीय व्यापार सुविधा समिति जैसे कई संस्थान स्थापित किये जायेंगे। देश के प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडलों ने देश में कारोबार करने में सरलता के लिये उठाये गये कदमों का स्वागत किया है। निर्यातकों के संगठन फियो ने हालांकि ब्याज सब्सिडी लाभों को शुरू किये जाने की मांग की है।

फियो के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने कहा, ब्याज सब्सिडी योजना की जल्द से जल्द घोषणा की जानी चाहिये ताकि निर्यातकों के समक्ष एक स्थायी रूपरेखा हो जिसके आधार पर वह नये निर्यात आर्डर ले सकें। ब्याज सहायता योजना पिछले साल अप्रैल में समाप्त हो गई। नई विदेश व्यापार नीति में कृषि उत्पादों के निर्यात को अधिक प्रोत्साहनों की घोषणा की गई है। इसके अलावा राज्यों के साथ निर्यात बढ़ाने के लिये काम करने के वास्ते एक निर्यात संवर्धन मिशन स्थापित करने पर जोर दिया गया है।

खेर ने कहा कि विदेश व्यापार नीति की निरंतरता बनाये रखने के लिये इसकी सालाना समीक्षा के बजाय अब ढाई साल में समीक्षा होगी। उन्होंने कहा, विभिन्न सरकारी विभागों में आयात-निर्यात के महत्वपूर्ण प्राधिकृत स्थानों पर वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया है। नीति के तहत अन्य प्रोत्साहनों में सरकार ने अब शुल्क क्रेडिट पर्चियों को पूरी तरह से हस्तांतरणीय बनाने की घोषणा की है। इन्हें अब सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवाकर भुगतान के लिये इस्तेमाल किया जा सकेगा।

सेवा निर्यात को बढ़ावा देने के लिये नई नीति में भारत से सेवित योजना के स्थान पर अब भारत से सेवा निर्यात योजना (एसईआईएस) लाई गई है। इस योजना के तहत व्यावसायिक सेवाओं, होटल और रेस्त्रां को तीन प्रतिशत की दर से प्रोत्साहन पर्ची दी जायेगी जबकि दूसरी विशिष्ट सेवाओं के लिये पांच प्रतिशत की दर से ऐसी पर्ची मिलेगी।

नीति में कहा गया है कि भारत से वस्तुओं की निर्यात योजना (एमईआईएस) के तहत जिन प्रमुख क्षेत्रों को समर्थन दिया जायेगा उनमें प्रसंस्कृत, पैकेजिंग कृषि और खाद्य वस्तुओं, कृषि और ग्रामोद्योग वस्तुयें शामिल होंगी।

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) दायित्वों को निभाने के लिये नीति में एक राष्ट्रीय व्यापार सुगमता समिति बनाने का प्रस्ताव किया गया है। व्यापार नीति में कस्टम प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने पर जोर दिया गया है ताकि निर्यातकों की लेनदेन लागत कम हो। ब्रांड इंडिया तैयार करने के लिये एक दीर्घकालिक ब्राडिंग रणनीति की अवधारणा की गई है ताकि उंची प्रतिस्पर्धा भरे वैश्विक परिवेश में भारतीय उत्पाद टिके रहें और उच्च गुणवत्ता के साथ ‘ब्रांड इंडिया’ की पहचान बने।

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