मीडिया मनोरंजन क्षेत्र में कर को युक्तिसंगत बनाने की जरूरत

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Monday 29th of February 2016 05:34:46 PM

विशेषज्ञों ने 2016-17 के बजट में मनोरंजन कर को युक्तिसंगत बनाने, न्यूजप्रिंट को वैट से छूट देने तथा टैलीविजन चैनलों को अस्थायी रूप से मिलने वाले सिनेमा अधिकार पर दोहरा कराधान समाप्त करने पर जोर दिया है।   
 
केयर रेटिंग्स ने बजट-पूर्व एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘फिलहाल डीटीएच तथा केबल सेवा जैसे मनोरंजन उद्योग लाइसेंस शुल्क तथा सेवा कर जैसे बहु-कराधान तथा शुल्क के बोझ से जूझ रहे हैं।’’ उसने कहा, ‘‘इतना ही नहीं उच्च दर से मनोरंजन कर तथा विभिन्न राज्यों में कर दरों में एकरूपता का अभाव उद्योग पर बोझ बढ़ा रहे हैंं।’’  
 
रिपोर्ट के अनुसार मनोरंजन कर विभिन्न राज्यों में फिलहाल 30 प्रतिशत से लेकर 70 प्रतिशत तक है। इसमें जीएसटी के अंतर्गत सभी श्रेणी के उत्पादों पर एक समान, सरल और एकल बिंदु कराधान का आह्वान किया गया है। सरकार की अप्रैल 2016 से जीएसटी क्रियान्वित करने की योजना है लेकिन विधेयक राज्यसभा में अभी अटका पड़ा है जहां सरकार के पास पर्याप्त संख्या नहीं है। कांग्रेस प्रस्तावित कानून में 3 प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है।  
 सिनेमा के प्रसारण के लिए टैलीविजन चैनलों को अस्थायी रूप से मिलने वाले अधिकार पर वैट तथा सेवा कर दोनों लगता है। डेलायट हासकिन्स एंड सेल्स पार्टनर आशीष जैन ने कहा, ‘‘इस दोहरे कराधान में विसंगति को दूर करने तथा लंबित जीएसटी को क्रियान्वित करने की जरूरत है।’’ उन्होंने कहा कि उत्पादन एवं लाजिस्टिक लागत बढऩे के साथ न्यूजप्रिंट को वैट से छूट की मांग तार्किक है। 

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