तैयारी शुरू हो गयी है, अब सभी ऑनलाइन शॉपिंग पर लगेगा जीएसटी

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Friday 17th of June 2016 08:42:22 AM

आगामी मानसून सत्र में संसद में जीएसटी बिल पास होने की पूरी उम्मीद है क्योंकि तमिलनाडु को छोड़कर बाकी राज्य जीएसटी के प्रावधानों पर सहमत हो गए हैं. हालांकि जीएसटी बिल के पास होने से उन लोगों को झटका लगेगा जो ऑफर में खरीदारी करना पसंद करते हैं. माना जा रहा है कि जीएसटी आने के बाद बाय वन गेट वन स्कीम के बंद होने का अंदेशा है. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि मॉडल जीएसटी लॉ में एक सामान खरीदने पर दूसरा मुफ्त मिलने वाला सामान टैक्स के दायरे में आ जाता है. लिहाजा अगर आप एक सामान खरीदने पर दूसरा मुफ्त लेंगे तो उसपर टैक्स तो चुकाना ही होगा. जीएसटी कानून में बिना पैसे के दिए जाने वाले सामान को टैक्सऐबल बनाया गया है. यानी फ्री मिलने वाले सामान पर खरीदने वाले को जीएसटी चुकाना होगा.

सरकार ने जीएसटी बिल का जो ड्राफ्ट पेश किया है, उसमें ई-कॉमर्स सेक्टर को भी इसके दायरे में लाया गया है. लेकिन ऑनलाइन शापिंग को जीएसटी के दायरे में लाने का फैसला ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए खतरे की बात हो सकता है क्योंकि जीएसटी के ड्राफ्ट कानून में ई-कॉमर्स सेलर्स पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स यानी टीसीएस का प्रस्ताव उन्हें नुकसान पहुंचाने वाला है. भारत की नंबर 1 ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी फ्लिपकार्ट ने जीएसटी बिल को छोटे-मझोले सेलर्स के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे उन ऑनलाइन सेलर्स को ना सिर्फ ज्यादा पूंजी जुटानी पड़ेगी, बल्कि उनके लिए कम मार्जिन पर काम करना भी मुश्किल होगा.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी बिल के प्रावधान लागू होने के बाद से बाजार में एक खरीदों एक मुफ्त पाओ जैसे ऑफर कम हो जाएंगे. यदि कंपनी कोई चीज मुफ्त या ऑफर के तहत दे रही तो भी उस पर जीएसटी लगेगा. ऐसे उत्पादों पर फिल्हाल केवल एक्साइज ड्यूटी लगती है. इस पर वैट नहीं देना पड़ता है लेकिन अब वैट के रूप में इसकी गाज उपभोक्ताओं पर पड़ेगी.

माना जा रहा है कि इस बिल के लागू होने से ई-कॉमर्स उद्योग पर बुरा असर पड़ेगा. जीएसटी के ड्राफ्ट कानून में ई-कॉमर्स कारोबारियों पर टीसीएस का प्रस्ताव उन्हें भारी नुकसान पहुंचाएगा. इससे उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सामान महंगा मिलेगा और वे स्थानीय बाजार से कीमतों की तुलना करने के बाद ही सामान खरीदेंगे. हालांकि यह साफ नहीं है कि क्या प्रमोशन के लिए मुफ्त बांटे जाने वाले प्रॉडक्ट पर भी यह कर देय होगा? यदि ऐसा होता है तो इसका कंपनियों की सेल्स और मार्कटिंग पॉलिसी पर बड़ा ज्यादा असर होगा. अभी ये साफ होना बाकि है कि बिजनेस प्रमोशन के लिए दिए जाने वाले फ्री सैंपल भी क्या दायरे में आएंगे.

हालांकि जानकारों के मुताबिक जीएसटी लागू होने से पूरे सिस्टम में टैक्स नीतियां बिल्कुल साफ हो जाएंगी. अभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचने वाले सेलर्स को केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स अलग-अलग भरने पड़ते हैं. कई राज्यों में तो अलग से एंट्री टैक्स या सरप्लस लेवी भी लगाई जाती है. इन सबसे हटकर जीएसटी से एक ही टैक्स से ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों को भी फायदे होंगे.

हालांकि गुड्‍स एंड सर्विसेस टैक्स यानी वस्तु एवं सेवा कर को 1947 के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार (टैक्स रिफॉर्म) माना जा रहा है. देश में साल 2006-07 के आम बजट में पहली बार इसके बारे में बताया गया था. सरकार का दावा है कि ये इनडायरेक्ट टैक्स की नई पद्धति होगी जो मौजूदा सभी टैक्स को हटाकर उनकी जगह ले लेगी.

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