इन बातो को ध्यान में रख कर ले एलआईसी पॉलिसी

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Wednesday 17th of August 2016 10:11:36 AM

अपने जीवन में जीवन बीमा लेने की जरूरत हम सभी को पड़ती है. आजकल अनिश्चितता भरी जिंदगी में जीवन बीमा का कवच अपने परिवार को देना बहुत जरूरी है. आजकल तो देश में काफी सारी बीमा कंपनियां हो गई हैं लेकिन एक समय था जब सिर्फ एलआईसी की बीमा पॉलिसी का ही आपके पास था. खैर आजकल आप कई कंपनी की पॉलिसी ले सकते हैं लेकिन सरकारी कंपनी की बीमा पॉलिसी लेनी है तो सिर्फ आपके पास एलआईसी का ही विकल्प है.
1- आपका पॉलिसी बांड और उसकी सुरक्षाः पॉलिसी बांड वह दस्तावेज है जो बीमे के लिए आपका प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद हम आपको देते हैं. जोखिम लाभ आपका प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद आरंभ हो जाता है और आपकी पॉलिसी की शर्तें व विशेषाधिकारों का जिक्र पॉलिसी बांड में होता है. यह एक महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट है जिसका उल्लेख आपको दी जाने वाली सेवा के विभिन्न चरणों में किया जाएगा.
2-अपना पॉलिसी बांड सुरक्षित रखें. इसकी आवश्यकता पॉलिसी पर दावों के निपटारे के समय पड़ेगी. आपको इसकी आवश्यकता तब भी पड़ेगी जब आप पॉलिसी पर लोन लेना चाहेंगे या पॉलिसी को बंद करना चाहेंगे. अपने जीवनसाथी/अभिभावकों/ को बताएं कि पॉलिसी कहां रखी गई है. यदि आपने पॉलिसी बांड किसी को या अपने ऑफिस को दिया है तो उनसे लिखित स्वीकृति ले लें. अपने संदर्भ के लिए पॉलिसी की फोटोकॉपी जरूर रखें.
3-आपका पॉलिसी नंबरः आपका पॉलिसी नंबर 9 डिजिट का होता है और आपके पॉलिसी बांड की अनुसूची के ऊपर वाले बाएं कोने पर पाया जा सकता है. यह एक अनोखी पहचान संख्या है जो आपकी पॉलिसी को दूसरों की पॉलिसी से अलग करती है और पॉलिसी के मैच्योर होने या खत्म होने तक बदलती नहीं है.
4-किसी भी पत्राचार में अपना पॉलिसी नंबर लिखना न भूलें क्योंकि इससे कंपनी को आपके रिकार्ड ढूंढने में मदद मिलती है. पॉलिसी शर्तें हर पॉलिसी अलग अलग आवश्यक्ताओं के अंतर्गत ली जाती है. इसलिए आपकी पॉलिसी के लिए शर्तें, प्लॉन व पॉलिसी की टर्म के मुताबिक अलग अलग होंगी. पॉलिसी अनुसूची आपकी पॉलिसी के पहले पन्ने पर होती है. उसमें उक्त जानकारी के अलावा नामित व्यक्ति, आपका पता आदि समेत अन्य जानकारियां दी जाती हैं. इस पर आपकी पॉलिसी आरंभ होने की तिथि, जन्मतिथि, मैच्योरिटी की तारीख, प्रीमियम भुगतान की अंतिम तिथियां व महीने आदि भी दर्शाये होते हैं.
5-दूसरे पन्ने से पॉलिसी की विभिन्न शर्तों जैसे जोखिम सुरक्षा, अतिरिक्त जोखिम सुरक्षा (यदि चुनी गई है तो), सभी पॉलिसियों के लिए उपलब्ध मानक एडीशनल बेनेफिट्स, एक्सीडेंटल बेनेफिट (यदि चाहा गया है तो), किन परिस्पितियों में हितलाभ देय नहीं हैं. और बीमा अनुबंध की अन्य शर्तों की जानकारी दी हुई होती है.
6-पॉलिसी में संशोधनः जब आप अपनी पॉलिसी में कुछ संशोधन (बदलाव) करना चाहते हैं जैसे प्रीमियम भुगतान की विधि, प्रीमियम भुगतान अवधि में कमी आदि. तो आप को अपनी पॉलिसी से संबद्धित ब्रांच को आग्रम कार्रवाई हेतु लिखित आवेदन देना होगा. हमारी जीवन बीमा पॉलिसियों में कई अलग अलग तरह के संशोधन हैं जिनकी अनुमति दी जाती है.
7-आपका संपर्क पता, हमेशा हमसे संपर्क बनाये रखें: आपका पता कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. आपके नये पते के बिना एलआईसी आपको कोई भी सेवा देने के लिए संपर्क की स्थिति में नहीं होंगे. हम नहीं चाहेंगे कि इस महत्वपूर्ण जानकारी के अभाव में आपको किसी भी लाभ से वंचित रखा जाए. जब भी आप अपना घर बदलें, कंपनी को नये पते के बारे में बताएं. अन्यथा हम आपको जो भी सूचना भेजेंगे, जैसे प्रीमियम नोटिस, मैच्योरिटी के लिए भुनाए जाने वाले वाऊचर और मैच्योरिटी बेनेफिट्स आदि, आप तक देरी से पहुंचेंगे.
8-एल.आइ.सी. पते में परिवर्तन, टेलीफोन, मोबाइल नंबरों और ईमेल पतों को आपके संपर्क पते की जानकारी में समाहित करता है. कृपया अपनी शाखा को उक्त सभी जानकारियां आपके पॉलिसी रिकार्ड में शामिल करने को कहें. इसके अलावा अपने पॉलिसी बांड की जांच करें और देखें कि जो जन्मतिथि दी गई है, क्या वह सही है. यह उन कारकों में से एक है जिनके आधार पर आपकी पॉलिसी पर आपका प्रीमियम निर्धारित होता है. यही उन सभी पॉलिसियों का आधार भी बनता है, जो भविष्य में आप लेते हैं.
9-अगर आपकी पिछली पॉलिसियों में आपकी जन्मतिथि नहीं है और आपके पास किसी सक्षम अधिकारी की तरफ से जारी किया गया जन्म प्रमाणपत्र है, आप उसकी साक्ष्यांकित प्रति हमें भेज सकते हैं और अनुरोध कर सकते हैं कि आपकी आयु को हम स्वीकार करें (आयु स्वीकृति हेतु कौन से प्रमाणपत्र एलआइसी स्वीकार करती है यह जानने के लिए यहां क्लिक करें )नामांकनसुनिश्चित करें कि नामित व्यक्तियों के नाम पॉलिसी बांड में सही तरीके से शामिल किये गये हैं. पॉलिसी की समाप्ति तक किसी भी समय आप अपनी पॉलिसी में नामिनेशन में बदलाव कर सकते हैं.
10-यदि आपने अब तक नामिनेटेड व्यक्ति का नाम पॉलिसी में शामिल नहीं किया है तो देर न करें. अपने नामिनेटेड व्यक्ति के बारे में एलआईसी को तुरंत बताएं. कृपया जान लें कि नामिनेशन में बदलाव आप उसी ब्रांच में कर सकते हैं जो आपकी पॉलिसी ऑपरेट करती हैं. नामिनेटेड व्यक्ति वह है जिसे, पॉलिसी की शर्तों के दायरे में आपके साथ कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना होने की स्थिति में बीमा दावे की रकम का भुगतान किया जाएगा. आमतौर पर आप बीमा पॉलिसी अपने परिवार के फायदे के लिए लेते हैं. इसलिए ऐसे व्यक्ति को नामिनेट करें जो आपकी अनुपस्थिति में आपके परिवार को सारे फायदे दे सके. आमतौर पर सभी जीवनसाथी या माता-पिता को नामिनेट करते हैं.
11-आप किसी नाबालिग जैसे अपने बच्चों को भी नामित कर सकते हैं लेकिन ऐसी स्थिति में आपको किसी दूसरे व्यक्ति का नाम भी देना होगा जो उस नाबालिग के हितैषी के रूप में नियुक्त होगा. अगर आप अपनी पॉलिसी की एवज में एलआइसी या अन्य किसी वित्तीय संस्थान से लोन ले रहे हैं तो आपकी पॉलिसी एलआइसी या वित्तीय संस्थान को ट्रांसफर करनी होगी. जब आप अपनी पॉलिसी ट्रांसफर करेंगे तो पॉलिसी का शीर्षक आपके नाम के बजाय संस्थान के नाम हो जाएगा.
12-लोन चुकाने के बाद आपकी पॉलिसी फिर आपके नाम हो जाएगी. पॉलिसी के दोबारा आपके नाम होने के बाद आपको फिर से नामांकन करना होगा. अगर आपने लोन नहीं लिया लेकिन किसी खास उद्देश्य से फिर भी पॉलिसियों को ट्रांसफर किया जा सकता है.
13-प्रीमियम कब भरें: डाक में देरी के कारण हमारे नोटिस नहीं भी पहुंचें तो प्रीमियम का भुगतान समय पर करें. एल.आइ.सी. सामान्यत प्रीमियम का नोटिस बकाया प्रीमियम माह से 1 महीने पहले भेज देती है. वह महीने जिनमें प्रीमियम भरा जाना है पॉलिसी बांड के पहले पन्ने पर दिखाए जाते हैं.
14-प्रीमियम भुगतान के लिए छूट की अवधिः अगर आपने प्रीमियम निर्धारित तिथि तक नहीं भरा तब भी आपको बिना ब्याज के प्रीमियम भरने के लिए कुछ समय मिलता है इस अवधि को ग्रेस पीरियड यानी छूट की अवधि कहते हैं (इसमें कुछ प्लान शामिल नहीं हैं). उन पॉलिसियों के लिए छूट की अवधि निर्धारित तिथि से 15 दिन है जहां प्रीमियम का भुगतान मासिक है. तिमाही, छमाही या वार्षिक प्रीमियम भुगतान वाली पॉलिसियों के लिए यह अवधि एक महीना लेकिन ३० दिन से कम नहीं है.
15-प्रीमियम का भुगतान कहां और कैसे करें? शाखा कार्यालय में नकदी, स्थानीय चेक यानी धनादेश (चेक के भुगतान मिलने पर), डिमांड ड्राफ्ट के जरिये. डीडी, चेक या मनी आर्डर डाक के जरिये भेजे जा सकते हैं. आप अपना एलआईसी की किसी भी शाखा में भर सकते हैं क्योंकि कंपनी की 99 फीसदी शाखाएं नेट से भी जुड़ी हुई हैं. कई बैंक प्रीमियम की रकम आपके खाते में काटने के निर्देश स्वीकार करते हैं. इस तरह आप अपने बैंक को कह सकते हैं कि वह आपके खाते से प्रीमियम की रकम काटे और बैंकर चेक के माध्यम से एल.आई.सी. को पॉलिसी बांड में उल्लिखित निर्धारित तिथि तथा महीनों में दे दें. इंटरनेट के जरिये प्रीमियम का भुगतान इंटरनेट से सेवाप्रदाताओं जैसे एच.डी.एफ.सी. बैंक, आई.सी.आई.सी.आई. बैंक, टाइम्स ऑफ मनी, बिल जंक्शन, यूटीआई बैंक, बैंक ऑफ पंजाब, सिटी बैंक, कार्पोरेशन बैंक, फेडरल बैंक और बिल डेस्क के .जरिये किया जा सकता है. प्रीमियम का भुगतान कार्पोरेशन बैंक और यूटीआई बैंक के एटीएम के .जरिये भी किया जा सकता है. प्रीमियम का भुगतान इलेक्ट्रानिक क्लियरिंग सर्विस के जरिये भी किया जा सकता है.
16-पॉलिसी की स्थितिः पॉलिसी की स्थिति दर्शाती है कि आपकी पॉलिसी चालू है या प्रीमियम का भुगतान न करने के कारण बंद हो चुकी है. इससे आपको अपनी पॉलिसी के संबंध में और भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है.

तो इन सब बातों का ध्यान एलआईसी पॉलिसी लेते वक्त रखिए और आप बिना किसी परेशानी अपनी एलआईसी पॉलिसी के सारे फायदे ले सकते हैं.
 

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