AAP रैली में किसान की मौत: राजनीतिक पैंतरों से बाज नहीं अाएंगे नेता

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Friday 24th of April 2015 10:40:41 AM

कोई जीए या मरे इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता,इन्हें तो बस राजनीतिक पैंतरों से मतलब है। हम बात कर रहे हैं नेताअों की जो कहीं,कभी भी राजनीति पैंतरों को खेलने से बाज नहीं अाते। अाज अगर किसी को घाटा पड़ा तो वे है किसान का परिवार। किसान ने तो जान दे दी लेकिन फायदा उठाएंगे नेता लोग। जो किसान की मौत की अाड़ में केजरीवाल सरकार को घेरने से बाज नहीं अाएंगे। विपक्ष बातें तो बड़ी करेगा , बातों ही बातों में सहायता भी देगा फिर चाहे वो सहायता वर्षों तक लटक ही क्यों न जाएं।आम आदमी पार्टी की रैली में बुधवार को खुदकुशी करने वाले किसान गजेंद्र का अंतिम संस्कार राजस्थान के दौसा में उसके गांव नांगल झमरवाड़ा में हुआ। इससे पहले राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, अशोक गहलोत और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मृत किसान गजेंद्र के घर पहुंचे और अपनी शोक संवेदनाएं जताईं। 

वहीं गजेंद्र सिंह के गांव पहुंचे राजस्थान सरकार के समाज कल्याण मंत्री अरुण चतुर्वेदी का लोगों ने घेराव किया। गजेंद्र की मौत के बाद हरियाणा के रेवाड़ी के कुण्डल गांव में भी शोक का माहौल है। यहां गजेंद्र की बहन का ससुराल है। जब गजेंद्र यहां आता था तब पगड़ी बंधवाने वालों में होड़ लगी रहती थी। 

गजेंद्र की अंतिम यात्रा में पहुंचे राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यह ताबाही कोई मामूली तबाही नहीं है। हमने पहले भी आगाह किया था राज्य सरकार को, अभी तक राज्य सरकार की समझ में बात नहीं आ रही है। सचिन पायलट ने कहा कि यह सिस्टम की विफलता की वजह हुआ है, हम हर संभव मदद करेंगे। गजेंद्र के परिजनों ने मौत के लिए आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि उसे खुदकुशी के लिए उकसाया गया होगा। पड़ोसियों का कहना है कि गजेंद्र की मौत की खबर सुनते ही उनके वृद्ध पिता बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े थे।परिजनों के बयान को गंभीरता से लेते हुए खुदकुशी मामले की पड़ताल के लिए क्राइम ब्रांच की टीम दिल्ली से राजस्थान के दौसा पहुंच गई है। पुलिस इस बात का पता लगाएगी कि आखिर किन परिस्थतियों में किसान गजेंद्र ने खुदकुशी की।  इस घटना ने भूमि अधिग्रहण बिल के मामले में सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। राजधानी में किसान के आत्महत्या करने के बाद विपक्ष सरकार को छोड़ने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष पहले से ही सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाती रहा है और उसका कहना रहा है कि सरकार केवल कॉर्पोरेट्स को फायदा पहुंचाने के लिए लैंड बिल पास कराने की कोशिश कर रही है। 

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