शिवपाल-अखिलेश का साथ काम करना मुश्किल

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Tuesday 20th of September 2016 04:39:01 PM

समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के बाद अब सत्ता और संगठन में तालमेल बनाना टेढ़ी खीर हो गया है। रविवार को राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के भांजे और सोमवार सुबह अखिलेश के नजदीकी सात युवा नेताओं को सपा से निष्कासित करने के फैसले से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के बीच पहले से बनी दरार और गहरा गई है।
इससे सपा व सरकार का आंतरिक संघर्ष तेज होने के आसार हैं। यह सत्ता व संगठन में बीच टकराव की स्थिति तक पहुंच सकता है। अभी तक प्रदेश सरकार के मुखिया व सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद की दोनों ही जिम्मेदारियां अखिलेश के पास थी। सत्ता और संगठन के सर्वोच्च पद उनके पास होने के कारण वे दोनों में तालमेल बैठाते थे।
उन्होंने अपनी टीम इसी तरह खड़ी की थी कि सत्ता व संगठन में समन्वय बना रहे। उनमें टकराव की स्थिति पैदा न हो। सीएम ने कुछ अफसरों को जिम्मेदारी सौंप रखी थी कि वे संगठन से जुड़े नेताओं की बात सुनकर उन पर कार्रवाई करें। कुनबे में घमासान के बीच 13 सितंबर को अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाकर जिम्मेदारी वरिष्ठ मंत्री शिवपाल को दे दी गई थी। इसकी प्रतिक्रिया में सीएम ने शिवपाल के सभी महत्वपूर्ण विभाग छीन लिए थे।
दोनों के बीच मतभेदों को सपा मुखिया ने किसी तरह सुलह तक पहुंचाया, लेकिन रविवार को रामगोपाल यादव के भांजे एमएलसी अरविंद प्रताप सिंह और सोमवार को अखिलेश के नजदीकी विधान परिषद सदस्य सुनील यादव साजन, आनंद भदौरिया, संजय लाठर और युवा संगठनों के तीन प्रदेश अध्यक्षों व एक राष्ट्रीय अध्यक्ष के निष्कासन से हालात विस्फोटक हो गए हैं। युवा नेता पदों से इस्तीफा दे रहे हैं, पार्टी नेतृत्व के फैसले पर विरोध जता रहे हैं। इससे तालमेल के बजाए घमासान और बढ़ने की संभावना है।
 

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