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मनमानी फीस पर लगाम के लिए सेल्फ रेगुलेटरी कमीशन का गठन:ममता

Posted by: अंकित शुक्ला Thursday 1st of June 2017 04:35:24 PM

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी देते हुए कहा कि एडमिशन के नाम पर मोटी रकम डोनेशन के रूप में वसूली का एक रैकेट काम कर रहा है. अब ऐसा नहीं चलेगा. डोनेशन लेने पर कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री ने टाउन हॉल में निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान सेल्फ रेगुलेटरी कमीशन (स्व-नियामक आयोग) के गठन का निर्देश दिया. इसमें सरकार के भी प्रतिनिधि रहेंगे.

बैठक में मुख्यमंत्री ने शहर के प्रमुख स्कूल ला मार्टिनियर का नाम लेते हुए कहा कि सबसे अधिक फीस इस स्कूल में लिए जाने की शिकायत मिली है. यहां वार्षिक फीस के रूप में दो लाख 47 हजार रुपये लिये जा रहे हैं. 

भारी डोनेशन लिए जाने की सबसे अधिक शिकायत इसी स्कूल की मिली है. मुख्यमंत्री ने कहा कि काफी आरोप लग चुके हैं. पुलिस में मामला भी दायर हो चुका है. सुश्री बनर्जी ने बैठक में मौजूद स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि को कहा कि शायद यह आपकी जानकारी में न हो, पर कुछ बिचौलिये हैं, जो यह काम कर रहे हैं. एक रैकेट काम कर रहा है.

आप लोग इस पर नजर दीजिए. मुख्यमंत्री ने सेंट जेवियर्स स्कूल पर भी मनमानी फीस वसूलने का इलजाम लगाते हुए कहा कि आप लोगों के खिलाफ भी काफी शिकायतें मिली हैं. पांच-पांच लाख रुपये आप लोग फीस के नाम पर ले रहे हैं, यह आखिर कैसी पढ़ाई है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. आप लोगों को आखिर इतने पैसे की क्या जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसी के खिलाफ नहीं है आैर न ही किसी पर कुछ लादना चाहती हैं.

मानवीय कारणों से एवं शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के मकसद से उन्होंने यह बैठक बुलायी है.अतिरिक्त व अत्यधिक फीस व डोनेशन लेने के आरोप पर जहां मुख्यमंत्री ने किसी को हल्के-फुल्के अंदाज में फटकार लगायी तो किसी को सतर्क किया. उन्होंने आइसीएसइ में अच्छा रिजल्ट करने के लिए स्कूलों की तारीफ भी की. लेकिन इस बैठक के जरिये उन्होंने यह साफ कर दिया कि प्राइवेट स्कूल अब डोनेशन नहीं ले सकेंगे. मुख्यमंत्री ने स्कूलों के नाम ले-ले कर उनसे सवाल पूछे.

मुख्यमंत्री ने शहर के नामी-गिरामी स्कूलों के प्रतिनिधियों से पूछा कि आखिर एडमिशन फीस, ट्यूशन फीस, सेशन फीस, कंप्यूटर फीस, डेवलपमेंट फीस, स्पोर्ट्स व कल्चरल एक्टिविटी फीस के नाम पर इतने पैसे क्यों वसूले जाते हैं. आखिर छात्रों को स्कूल से ही पुस्तक, ड्रेस, जूते, बैग इत्यादि अनिवार्य रूप से लेने के लिए क्यों मजबूर किया जाता है. स्कूल बंद होने पर भी छात्रों से ट्रांसपोर्ट फीस व समर कैंप के नाम पर फीस वसूली जाती है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों की फीस तय करने के लिए एक कमेटी बनायी गयी है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों में ऐसा नहीं है. सभी स्कूल अपनी-अपनी तरह से मनमानी फीस निर्धारित करते आैर उसमें वृद्धि करते हैं. दाखिले के समय इतनी मोटी रकम मांगी जाती है कि आम लोगों के लिए अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना संभव ही नहीं है.  जिनके पास अथाह पैसा है, उनके लिए तो ठीक है, पर जिस तरह से स्कूल फीस में वृद्धि करते हैं आैर मनमानी फीस वसूलते हैं, उसे आम लोगों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है. फीस के दबाव में लोग मानसिक रूप से बीमार हो जा रहे हैं.

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