मंत्रालय जाने के बाद नरम पड़े शिवपाल, कहा- जो मुलायम कहेंगे वही करूंगा

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Wednesday 14th of September 2016 05:00:14 PM

यूपी की राजनीति में भूचाल आ गया है. मुलायम ने अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष से हटाकर शिवपाल को जिम्मेदारी दी तो कुछ देर बाद ही भतीजे अखिलेश यादव ने शिवपाल का कद घटाकर उनसे पीडब्ल्यूडी सहित 7 मंत्रालय वापस ले लिये हैं. इसके बाद अब शिवपाल यादव ने सैफई में अपने समर्थकों के सामने भाषण दिया है. अपने तेवर नरम करते हुए उन्होंने कहा है कि जो मुलायम कहेंगे वही वे करेंगे.

अपने भाषण में शिवपाल ने मुलायम सिंह यादव का नाम तो लिया लेकिन अखिलेश का नाम नहीं लिया. शिवपाल यादव बोले कि ‘मेरा सारा विश्वास नेता जी(मुलायम सिंह यादव) में है. वो जो फैसला लेंगे सर्वमान्य होगा, मैं किसी से नाराज़ नहीं, लखनऊ में बात होगी.’ उन्होंने यह भी कहा कि संगठन के लिए वे लगातार काम करते रहेंगे. इस्तीफे संबंधित सवाल पर उन्होंने यही कहा कि जो नेताजी कहेंगे वह करूंगा.

इस बीच परिवार में गृहयुद्ध शांत करने के लिए मुलायम सिंह ने शिवपाल की पत्नी को अखिलेश औऱ शिवपाल में सुलह कराने को कहा है.  इससे पहले कल रात शिवपाल ने मुलायम सिंह से बात की और कह दिया कि अखिलेश के साथ काम नहीं कर सकते.

रात भर से सैफई में शिवपाल के घर के बाहर समर्थक जुटे हुए हैं. शिवपाल और अखिलेश यादव में सत्ता संघर्ष की ये लड़ाई सालों से चली आ रही है. समय-समय पर दोनों एक दूसरे को मात देने के लिए हर तरह की चाल चलते हैं. अभी महीने भर पहले 15 अगस्त को मुलायम सिंह यादव ने इस बात की पुष्टि भी कर दी थी कि दोनों में बनती नहीं है.

मुलायम के इस बयान के बाद लग रहा था कि चाचा भतीजे की ये लड़ाई अब शायद थम जाएगी. लेकिन यहां तो शह और मात देने का खेल हर दिन के हिसाब से बढ़ता ही जा रहा है. लखनऊ में मुलायम सिंह की कथित सहमति से शिवपाल ने बाहुबली अंसारी बंधुओं को पार्टी में शामिल कराया था.

लेकिन, 24 घंटे में ही अखिलेश ने विलय में अहम भूमिका निभाने वाले मंत्री को न सिर्फ बर्खास्त किया बल्कि ऐसा दबाव बना दिया कि कौमी एकता दल का विलय रद्द करना पड़ा. इस राजनीतिक घटना ने यूपी के सबसे बड़े राजनीतिक घराने के घमासान को सबके सामने ला दिया था.

इसके कुछ दिनों बाद ही 7 जुलाई को जब शिवपाल के करीबी दीपक सिंघल यूपी के मुख्य सचिव बने तो माना गया कि चाचा भतीजे में पैचअप हो गया है. लेकिन, दो महीने में ही सिंघल को चलता करके अखिलेश ने फिर चाचा शिवपाल को मात दे दी. सिंघल को लाने में अहम भूमिका अमर सिंह की भी थी.

लेकिन, खुद अमर सिंह को समाजवादी पार्टी में लाने के पक्ष में नहीं थे अखिलेश. अमर सिंह को लाने और राज्यसभा सांसद बनवाने में भी शिवपाल की भूमिका रही. जो अखिलेश को खटकती रही है. परिवार के समीकरण को समझें तो मुलायम परिवार साफ तौर पर दो गुटों में बंट चुका है.

एक गुट की कमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास है तो दूसरे का नेतृत्व शिवपाल यादव कर रहे हैं जो कि मुलायम सिंह यादव के भाई और अखिलेश यादव के सगे चाचा हैं. मुलायम परिवार में उनके अलावा पांच और सांसद हैं. वो सभी अखिलेश के साथ हैं.

पत्नी डिंपल, चाचा रामगोपाल यादव, रामगोपाल के बेटे अक्षय, मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव और मुलायम के पोते और लालू यादव के दामाद तेजप्रताप यादव. दूसरी तरफ शिवपाल यादव के खेमे में मुलायम सिंह के दूसरे कारोबारी बेटे प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव हैं.

कई मंचों पर शिवपाल की अखिलेश से नाराजगी भी देखने को मिलती रही है. अभी 20 अगस्त की ही बात है लखनऊ के एक कार्यक्रम में मंच पर डिंपल यादव, शिवपाल को सम्मान देकर मामले को संभालने की कोशिश करती दिखी थी. इस बार तो अखिलेश ने कथित तौर पर मुलायम के करीबियों को भी नहीं बख्शा है.

भ्रष्टाचार के आरोप में जिन दो मंत्रियों गायत्री प्रजापति और राजकिशोर सिंह को अखिलेश ने बर्खास्त किया वो दोनों मुलायम के करीबी थे. मुलायम ने भी माना कि उन्हें मीडिया से ही बर्खास्तगी का पता चला है. फिलहाल मामला गर्म है सरकार में शिवपाल के कद कम करने को लेकर.

शिवपाल से जिस पीडब्ल्यूडी विभाग को ले लिया गया है उसी मंत्रालय के अंडर में अखिलेश के तमाम मेगा प्रोजेक्ट का काम चल रहा था. कुछ दिनों बाद यूपी में चुनाव होने हैं. अखिलेश विकास के नाम पर जीतने की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन अभी तो परिवार के झगडे से ही उन्हें फुर्सत नहीं मिल रही है

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