टिकट कटने से कठोर हुए मुलायम के दो समधी

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Tuesday 24th of January 2017 04:04:59 PM

समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव के सर्वेसर्वा होने के बाद बहुत कुछ बदल चुका है. पार्टी में सारे फैसले लेने की ताकत 'नेताजी' (मुलायम सिंह) के हाथों से छिटक कर अखिलेश के पास आ गई है. इस नए माहौल में जिन नेताओं को टिकट नहीं मिल पाए या जिनके टिकट काट दिए गए, उन्होंने बगावती तेवर अपना लिए हैं. इनमें मुलायम सिंह यादव के दो समधी भी शामिल हैं. मुलायम के समधी रामवीर सिंह यादव और राम प्रकाश यादव ने सपा की ओर से जारी उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट में अभी अपना नाम नहीं होने से नाराज हैं. दोनों ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ लिया है. जहां रामवीर ने राष्ट्रीय लोकदल के टिकट से नामांकन भर दिया है वहीं रामप्रकाश ने निर्दलीय ही ताल ठोकने का मन बनाया है.

आपको बता दें कि फिरोजाबाद जिले में 11 फरवरी यानी दूसरे चरण में मतदान होना है. जसराना सीट से चार बार विधायक रह चुके और मुलायम सिंह के समधी रामवीर सिहं यादव को भरोसा था कि उन्हें समाजवादी पार्टी फिर अपना उम्मीदवार घोषित करेगी. लेकिन पार्टी की तीसरी लिस्ट में भी नाम नहीं होने से रामवीर की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया.

पार्टी से नाराज रामवीर सिंह यादव ने राष्ट्रीय लोक दल का दामन थामने में देर नहीं लगाई. रामवीर का सारा गुस्सा राम गोपाल यादव के खिलाफ है. रामवीर ने राम गोपाल पर संगीन आरोप लगाया कि वो उनकी हत्या कराना चाहते हैं. रामवीर के मुताबिक राम गोपाल ने उनके क्षेत्र में जानबूझ कर कोई काम नहीं होने दिया. रामवीर के मैदान में होने से यादव वोटों का बंटवारा होता है तो इसका सीधा नुकसान समाजवादी पार्टी को ही होगा.

तेजू भइया के नाना का टिकट कटा

रामवीर जैसी ही कहानी मुलायम के एक और समधी राम प्रकाश यादव उर्फ नेहरु की है. राम प्रकाश शिकोहाबाद नगर पालिका के अध्यक्ष हैं और शिकोहाबाद विधानसभा सीट से सपा का टिकट पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे. लेकिन अखिलेश ने उन पर भरोसा नहीं किया. ऐसे में रामप्रकाश अब निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. राम प्रकाश मैनपुरी से सांसद तेज प्रताप यादव के नाना हैं.

समाजवादी पार्टी ने 10 दिन पहले फिरोजाबाद में पार्टी जिलाध्यक्ष अमोल यादव की भी छुट्टी कर दी थी. अमोल यादव का आरोप है कि उनका उत्पीड़न किया जा रहा है और प्रशासन उनके पीछे पड़ा है. अमोल के मुताबिक उनकी सुरक्षा हटा दी गई है, ऐसे में उन्हें कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी राम गोपाल यादव और उनके बेटे अक्षय यादव की होगी.

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