जैसे भी संभव हो, हमारा लक्ष्य बिहार में बीजेपी को हराना: लालू

Posted by: Tauseef Friday 15th of May 2015 01:00:53 PM

बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व जनता परिवार के विलय में तकनीकी दिक्कत होने के सपा नेता रामगोपाल यादव के बयान की ओर इशारा करते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा कि इसका समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए गठबंधन बनाकर या जैसे भी संभव हो, इस वर्ष के अंत में होने वाला वह बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।पूर्व मुख्यमंत्री और अपनी पत्नी राबडी देवी के आवास पर राजद विधायकों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों को सबोधित करते हुए लालू ने कहा कि हमलोग जनता परिवार के विलय के प्रबल समर्थक हैं। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए हमारी पार्टी ने पूर्व में नीतीश कुमार और उसके बाद जीतन मांझी सरकार तथा वर्तमान में भी नीतीश सरकार को समर्थन दिया है।

उल्लेखनीय है कि गत रविवार को रामगोपाल यादव ने कहा था कि बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व तकनीकी कारणों से विलय की कोई संभावना नहीं है। हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गत सोमवार को इस विचार की अनदेखी करते हुए कहा था कि विलय की प्रक्रिया सही रास्ते पर धीरे-धीरे बढ़ रही है पर राजद सुप्रीमो ने इसमें तकनीकी बाधा को मानते हुए कहा कि इसका समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। बिहार विधान परिषद के 24 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के बारे में लालू ने कहा कि उक्त चुनाव लड़ने वाले जदयू और अन्य दलों के साथ वार्ता जारी है।

लालू ने केंद्र सरकार पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार हर मोर्चे पर नाकाम रही है। भाषण के अलावा एक काम भी पूरा नहीं हुआ। लोकसभा चुनाव पूर्व मोदी ने जो भी वादे किये उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी तबके को मोदी सरकार के कार्यकाल में राहत नहीं मिली और कोई काम नहीं हो रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के पार्टी सांसदों को बिहार विधानसभा चुनाव में लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए अगले तीन महीने के दौरान हरेक गांव जाने का कार्य दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर लालू ने कहा कि यह सभी सांसदों के लिए परेशानी वाला है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सांसद इतनी गर्मी में जहां बिजली और एसी नहीं है, जाएंगे। उन्होंने कहा कि उससे भी बडी समस्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सांसदों को आदर्श गांव चुनने का निर्देश दिया जाना है। एक गांव को आदर्श चुनने पर सभी सांसदों को चुनाव में जनता का आक्रोश झेलना पड़ेगा।

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