अमरिंदर ने पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की

Posted by: राधिका प्रकाश Friday 11th of November 2016 04:39:36 PM

कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख अमरिंदर सिंह ने एसवाईएल पर फैसले को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की और जल्द चुनाव कराने की भी मांग की है. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति करने के लिए समस्या पैदा करने का प्रयास करेंगे.

बादल जितनी जल्दी सत्ता से हटे उतना फायदा- अमरिंदर

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हम लोगों के पास जाएंगे. पंजाब के लोगों के हितों की रक्षा करने में विफल रहने के कारण बादल अब गड़बड़ी पैदा करने का प्रयास करेंगे और इसलिए जितना जल्दी वह सत्ता से हटेंगे राज्य के लिए उतना ही अच्छा होगा.’’

उन्होंने दावा किया कि इसके कारण राज्य की नाजुक हालत और भी खराब हो गई है और शरारती तत्व समस्या पैदा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि सीमा पार के आतंकवादी समूह स्थिति का फायदा उठाकर गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं.

तुरंत राज्यपाल शासन लगाया जाना चाहिए- अमरिंदर

अमरिंदर ने कहा, ‘‘इससे बचने के लिए राज्य में तुरंत राज्यपाल शासन लगाया जाना चाहिए और दिसम्बर में चुनाव कराए जाने चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि एसवाईएल मुद्दे का समाधान करने के लिए अकालियों के पास दस वर्ष का समय था लेकिन वे विफल रहे.

क्या है सतलुज यमुना लिंक विवाद

भाखड़ा बांध का पानी हरियाणा की यमुना नदी तक पहुंचाने के लिए सतलुज यमुना लिंक नहर बननी है. इस नहर की लंबाई 214 किलोमीटर है. हरियाणा के हिस्से वाली 92 किमी नहर बनकर तैयार है. वहीं पंजाब के हिस्से वाली 122 किमी का काम अभी अधूरा है.

8 अप्रैल, 1982 को इंदिरा गांधी ने रखी थी नींव

8 अप्रैल, 1982 को इंदिरा गांधी ने पटियाला के कपूरी गांव में नींव रखी थी, 1987 तक नहर का 90 फीसदी काम पूरा हो गया था. नहर का काम अकालियों के जबरदस्त विरोध की वजह से 1990 में पूरी तरह बंद हो गया.

1996 में सुप्रीम कोर्ट पहुंची हरियाणा सरकार

हरियाणा सरकार ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अब पंजाब में अमन है इसलिए नहर का काम शुरू होना चाहिए. कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा एक साल में नहर का काम पूरा करें लेकिन पंजाब सरकार ने काम करने से इंकार कर दिया.

20 साल बाद हरियाणा के पक्ष में आया फैसला

12 जुलाई, 2004 को कांग्रेस के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में बिल पेश कर पानी से जुड़े सारे समझौते रद्द कर दिए. इसके बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के जरिए सुप्रीम कोर्ट से नहर पर राय मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार के समझौते तोड़ने वाले कानून को असंवैधानिक बताया है और कहा कि कोई भी राज्य इस तरह एकतरफा कानून बनाकर समझौता नहीं तोड़ सकता.

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