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दिल्ली में किसान की खुदकुशी पर गरमाई सियासत

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Friday 24th of April 2015 11:26:36 AM

राजस्थान के एक किसान की आत्महत्या के मुद्दे पर दोषारोपण का खेल तेज हो गया। केंद्र सरकार और पुलिस ने आम आदमी पार्टी पर इसे उकसाने का आरोप लगाया। वहीं संसद में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई पड़ी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘काफी गहरी’ जड़ें जमा चुके कृषि संकट का सामूहिक समाधान ढूंढने की अपील की। लोगों के सामने एक किसान के आत्महत्या करने के मुद्दे ने संकट पर ध्यान केंद्रित कर दिया। प्रधानमंत्री ने राजस्थान के दौसा के रहने वाले किसान गजेंद्र सिंह के आत्महत्या करने पर ‘दुख’ प्रकट किया। गजेंद्र ने आप की रैली के दौरान कल आत्महत्या कर ली थी, जिसे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य ने संबोधित किया था।गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आप पर इसका दोष मढ़ा। उन्होंने कहा कि आप समर्थकों ने ताली बजाई और नारे लगाए और पुलिस को किसान को ऐसा करने से रोकने के लिए बात करने से रोका। दिल्ली पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में आप के अनाम नेताओं और कार्यकर्ताओं पर सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने और उसे बचाने के उनके प्रयासों में सभी तरह की बाधाएं डालने का आरोप लगाया।

प्राथमिकी में कहा गया है, ‘यह पूरी तरह ऐसी घटना है जिसमें आप कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उस व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए उकसाया और पुलिस द्वारा किए गए अनुरोधों पर भी उन्होंने ध्यान नहीं दिया।’ संसद मार्ग थाने में आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने), धारा 186 (लोकसेवक के अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में बाधा डालने) और धारा 34 (समान मंशा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। रैली जारी रखकर असंवेदनशीलता दिखाने के लिए निशाने पर आने के बाद आप नेताओं ने अपने खिलाफ आरोपों का खंडन करने के लिए दो संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने राजनाथ सिंह पर पलटवार करते हुए उनपर झूठ बोलने का आरोप लगाया।

पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा, ‘गृह मंत्री झूठ बोल रहे हैं और गुमराह करने वाला बयान दे रहे हैं। यह दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल करके आप को निशाना बनाने का केंद्र सरकार का हथकंडा है। मीडिया ने जैसे घटना हुई उसको रिकॉर्ड किया और उसे टेप को सार्वजनिक करना चाहिए ताकि सत्य को स्थापित किया जा सके।’ आप के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास ने कहा, ‘‘आपने अवश्य देखा होगा कि हम पुलिस से उसे बचाने का अनुरोध कर रहे थे। कृपया सचाई को दिखाएं कि कैसे हमने किसी को भी उकसाया नहीं है। कम से कम सदन के पटल पर तो सच बोलो।’ विश्वास के साथ पार्टी नेता संजय सिंह और आशुतोष भी थे।

भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर भाजपा नीत राजग सरकार पर हमले तेज कर चुकी कांग्रेस ने घटना की न्यायिक जांच की मांग की। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के नेतृत्व में पार्टी ने किसान की मौत पर शोक प्रकट करने के लिए मोमबत्ती जुलूस निकाला। संसद में विपक्ष ने दोनों सदनों में आत्महत्या के मुद्दे को उठाया और मौजूदा कृषि संकट को लेकर सरकार पर हमले किए। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और बयान दें। स्थगन के बाद दोनों सदनों ने देश में किसानों की समस्याओं पर तत्काल चर्चा की।

लोकसभा में अपने संक्षिप्त भाषण में किसानों के जीवन या मानव जीवन से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है, यह टिप्पणी करते हुए मोदी ने कहा, ‘किसानों को कष्ट पहुंचाने वाली समस्या काफी पुरानी, गहरी और व्यापक है और हमें उस संदर्भ में समाधान ढूंढना है’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि उन ‘कमियों’ का मूल्यांकन करना होगा जो उनकी सरकार के आने से पहले और उनकी सरकार के पिछले 10 महीने के कार्यकाल के दौरान रह गईं।

उन्होंने कहा, ‘इस बात को सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक संकल्प लिया जाना चाहिए कि किसान नहीं मरें। इस बात का पता लगाए जाने की आवश्यकता है कि क्या गलतियां हुई हैं और इस सरकार के आने से पहले क्या ‘कमियां’ रहीं और उनके कार्यकाल के दौरान क्या कमियां रहीं।’ उन्होंने कहा, ‘किसानों की आत्महत्या का मुद्दा कई साल से पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। हमें इस बात पर विचार करना होगा कि कहां गलतियां हुई और क्या कमियां रहीं।’ उन्होंने कहा, ‘पिछले 10 महीने में क्या कमियां रहीं। हम किसी भी सुझाव पर विचार करने को तैयार हैं ताकि कोई रास्ता ढूंढा जा सके। इस संकट से निपटने के लिए इस चर्चा के बाद हम सामूहिक संकल्प लें।’किसानों के कष्ट और संकट पर चर्चा शुरू करते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि संप्रग सरकार के भूमि कानून को बहाल रखा जाना चाहिए और राजग सरकार को राज्यसभा में विधेयक के पारित नहीं होने पर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने पर जोर नहीं देना चाहिए। जब सरकार ने भूमि अधिग्रहण पर दोबारा अध्यादेश जारी करने का कारण स्पष्ट किया तो विपक्षी सदस्यों ने शोर-शराबा किया। तृणमूल कांग्रेस के एक सदस्य ने एजेंडा पत्र की प्रति फाड़ दी और इसे सभापति के आसन के सामने फेंका। तृणमूल सदस्यों ने इस मुद्दे पर बहिगर्मन भी किया।

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