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उत्तराखण्ड में ईमानदारी नही भ्रष्टाचारी छींटे को मिल रहा है प्रोन्नति

Posted by: Publlic Akrosh ADMIN Friday 7th of November 2014 07:16:04 AM

देहरादून। उत्तराखंड में ईमानदार अधिकारी को दंड और भ्रष्ट अधिकारी को लाभ दिलाने का जो परंपरा चल रही है, उससे पूरी स्थिति ही गंभीर हो गई है। खूबी तो यह है कि जो अधिकारी पहले अच्छे ईमानदार अधिकारियों में माने जाते थे, उन पर भी भ्रष्टचार के छींटे पड़ रहे हैं। वर्तमान में उत्तराखंड पेयजल निगम इसका ज्वलंत उदाहरण है।  पिछले दिनों विभागीय पदोन्नति हेतु एक समिति बनी थी। जिसमें कई भ्रष्ट अधिकारियों को अच्छी जगह मिल गई। वर्तमान अपर मुख्य सचिव जो तत्कालीन प्रमुख सचिव थे के अध्यक्षता में एक समिति बनायी गई। जिसमें एस. राजू के अलावा सचिव कार्मिक सुरेन्द्र सिंह रावत, अपर सचिव अर्जुन सिंह रावत तत्कालीन प्रबंध निदेशक रवीन्द्र कुमार, प्रभारी मुख्य अभियंता उत्तराखंड पेयजल निगम सदस्य के रूप में थे।   इस समिति ने पेयजल निगम में अधीक्षण अभियंता १४ पदों के लिए डी.पी.सी. की इसके बाद अधिशासी अभियंताओं जिन्हें अधीक्षण अभियंता के रूप में चयनित किया गया है। इसी प्रकार अधिशासी अभियंताओं जिन्हें प्रभारी अधीक्षण अभियंता बनाया जाना चाहिए था,उनका भी चयन किया गया। इनमें एल.एम. कर्नाटक एवं सुनील कुमार पंत के बाद मुकेश कुमार गुप्ता का नाम रखा गया, जबकि श्री कर्नाटक एवं श्री पंत को असंतोषजनक प्रविष्टि दी गई थी और श्रीगुप्ता को उत्कृष्ट प्रविष्टि दी गई थी। असंतोष प्रविष्टि वाले को उत्कृष्ट प्रविष्टि वाले के ऊपर दिखाना विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में लाता है।   इसी संदर्भ में गुप्ता ने अपना प्रतिवेदन तत्कालीन प्रबंध निदेशक रवीन्द्र कुमार को दिया। तब उन्होंने अपनी टिप्पणी में उन्हें योग्य, कुशल और अच्छा अधिकारी करार दिया। कहा कि गोपनीय प्रतिवेदनों की प्रविष्टियां अंकित करने में योगेन्द्र सिंह प्रतिवेदक अधिकारी के मुकेश कुमार गुप्ता के प्रति व्यक्तिगत् द्वेषभाव का तत्व परिलक्षित होने एवं स्वीकत्र्ता अधिकारी भजन सिंह द्वारा उन्हीं की राय को वैल्यू किए जाने को दृष्टिगत रखते हुए एवं साथ ही साथ मुकेश कुमार गुप्ता द्वारा अपने तथ्यात्मक विवरण पर विचार करते हुए अद्योहस्ताक्षरी का मंतव्य है कि मुकेश कुमार गुप्ता को वर्ष २०१०-११के गोपनीय प्रतिवेदन की श्रेणी उत्तम में उच्चीकृत कर अति उत्तम एवं वर्ष २०११-१२ के गोपनीय प्रतिवेदन की श्रेणी उत्तम से उच्चीकृत कर उत्कृष्ट की जानी औचित्यपूर्ण होगी।   तत्कालीन प्रबंध निदेशक इंजीनियर रवीन्द्र कुमार की यह टिप्पणी इस बात का संकेत देती है कि कहीं न कहीं मामले में द्वेषभाव बरता गया है। यहां यह उल्लेख करना होगा कि इंजीनियर रवीन्द्र कुमार के बाद भजन ङ्क्षसह एम.डी. बने हैं और उन्होंने अपने चहेतों को प्रोन्नति और ईमानदारों को पदोन्नति दिए जाने का जो कार्य किया है वह चर्चा का विषय बना हुआ है।

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